पटना : राज्य में पहले चरण का चुनाव बिना किसी हिंसा के संपन्न हो गया. जिन चार लोकसभा जमुई, गया, औरंगाबाद और नवादा में चुनाव हुए उसमें करीब 50 बूथ ऐसे थे, जो अति संवेदनशील थे. ये इलाके नक्सलियों के गढ़ या मांद कहे जाते हैं.
इनमें वृहद सुरक्षा बंदोबस्त के लिए सीआरपीएफ और इसके विशेष फोर्स की करीब 35 कंपनियां तैनात की गयी थीं. इन इलाकों में मौजूद बूथों की चौकसी ड्रोन के अलावा एमआइ-17 हेलीकॉप्टर से निरंतर की जा रही थी. इसी का नतीजा है कि पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार करीब 20 फीसदी ज्यादा मतदान हुए.
इतना ही नहीं गैर-नक्सली इलाकों की तुलना में इन नक्सली इलाकों में वोटिंग ज्यादा हुई. गैर-नक्सली क्षेत्रों में वोटिंग का प्रतिशत 52 से 54 प्रतिशत रहा. जबकि, पूरी तरह से नक्सल प्रभावित इलाकों में वोटिंग का प्रतिशत करीब 60 फीसदी रहा.
गया के बेहद नक्सल प्रभावित इलाकों में एक चकरबंदा में पिछली लोकसभा 2014 में 34 फीसदी मतदान हुआ था, जो 2019 में बढ़ कर 50 फीसदी हो गया. इसी तरह इसी जिला के बहेरा (इमामगंज) में 34 फीसदी से बढ़कर इस बार 55 फीसदी, धनेटा (बांके बाजार) में 40 से बढ़कर 67 प्रतिशत के अलावा सेवरा (मेगरा) और कोल सहिता (डुमरिया) में पिछली बार की तुलना में वोटिंग करीब 20 फीसदी ज्यादा हुई.
जमुई और नवादा लोकसभा क्षेत्रों के बेहद नक्सल प्रभावित इलाकों में 2014 में 49.75 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो इस बार बढ़कर 53.06 प्रतिशत पहुंच गया. इस बार सीआरपीएफ की किलेबंदी और चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की वजह से नक्सलियों के वोट बहिष्कार का कोई असर नहीं पड़ा. चुनाव का विरोध और आमलोगों को वोट नहीं करने की चेतावनी के बाद भी इस इलाके में जमकर मतदान हुआ.
