लोकसभा चुनाव : पिछले चुनाव के धुरंधर इस बार नहीं दिख रहे मैदान में, राजनीतिक हाशिये पर जाने की चर्चा

पिछले लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करके धुरंधर साबित हुए कई माननीय इस बार चुनाव अखाड़े से बाहर हो गये हैं. इस बार ये लोग दिख नहीं रहे हैं. कुछ के बारे में यह भी संभावना जतायी जा रही है कि वे राजनीतिक हाशिये पर चले जायेंगे. इसमें कुछ नेता ऐसे भी हैं, जो पिछली […]

पिछले लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करके धुरंधर साबित हुए कई माननीय इस बार चुनाव अखाड़े से बाहर हो गये हैं. इस बार ये लोग दिख नहीं रहे हैं. कुछ के बारे में यह भी संभावना जतायी जा रही है कि वे राजनीतिक हाशिये पर चले जायेंगे. इसमें कुछ नेता ऐसे भी हैं, जो पिछली बार हारने के बाद भी उनका कद बड़ा है. इस बार भी ये चुनावी मैदान में नहीं दिख रहे हैं. हालांकि इसमें कुछ ऐसे भी हैं, जो दूसरे दल का सहारा लेकर रणक्षेत्र में उतरे हैं. भाजपा और जदयू का गठबंधन होने के कारण इस बार जिन सांसदों का टिकट कटा, उसमें अधिकतर चुनावी मैदान से गायब हैं.
इसमें वाल्मिकी नगर से सतीश चंद्र दुबे, मधुबनी से हुकुमदेव नारायण यादव (इनके बेटे को इस स्थान से टिकट मिला), झंझारपुर से बीरेंद्र कुमार चौधरी, दरभंगा से कृति झा आजाद, गोपालगंज से जनक राम, सीवान से ओम प्रकाश यादव, गया से हरि मांझी, भागलपुर से शाहनबाज हुसैन के अलावा हाजीपुर से रामविलास पासवान (इसी सीट पर भाई पशुपति पारस चुनावी मैदान में), औरंगाबाद से निखिल कुमार, शिवहर से लवली आनंद, सारण से राबड़ी देवी, जमुई से उदय नारायण चौधरी चुनावी मैदान से गायब हैं. इनका टिकट कटने के बाद ये चुनावी दंगल में किसी तरह की कोई जोर आजमाइश नहीं कर रहे हैं. वहीं, राज्य सरकार में कभीपूर्व मंत्री रहे नीतीश मिश्रा, सम्राट चौधरी, नागमणि, रमई राम और भीम सिंह भी इस बार चुनावी मैदान से बाहर हैं.

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