पटना : सूबे के किसानों का सूखा और बाढ़ के साथ चोली- दामन का साथ है. किसानों को कभी सूखा तो कभी बाढ़ के कारण नुकसान उठाना पड़ता है. पिछले साल खरीफ की खेती के समय बारिश नहीं होने के कारण किसानों को परेशानी हुई. इसके चलते पांच लाख टन कम चावल का उत्पादन हो सकता है. अभी अंतिम रिपोर्ट आनी बांकी है.
हालांकि समय पर डीजल अनुदान मिलने से बड़ा नुकसान होने से बच गया. डीजल अनुदान के चलते समय पर धान की सिंचाई होती रही, इससे उत्पादन पर बहुत असर नहीं हुआ. 32 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी. चालू वित्तीय वर्ष में डीजल अनुदान मद में 300 करोड़ की व्यवस्था की गयी है.
राज्य में खरीफ के मौसम में कम बारिश होने के चलते सरकार ने 280 प्रखंड को सूखाग्रस्त घोषित किया है. यहां के किसानों को सूखा राहत अनुदान तो मिला ही साथ ही समय पर डीजल अनुदान मिल जाने के कारण काफी राहत मिली.
इसमें डीबीटी ने अहम भूमिका निभायी. पहले किसानों को अनुदान का राशि मिलने में महीनों लग जाता था. अब 25 दिनों के भीतर किसानों के खाते में राशि चली जा रही है. कृषि विभाग के प्रधान सचिव सुधार कुमार ने पूरी व्यवस्था पर सख्त निगरानी रखी. धान में किसानों को पांच सिंचाई के लिए अनुदान मिला. चावल का उत्पादन प्रति हेक्टयर 21-22 प्रति क्विंटल रहने की उम्मीद है.
