पटना : विधानसभा में गुरुवार को पहली पाली की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, अन्य दिनों की तरह विपक्षी सदस्य खड़ा होकर हंगामा करने लगे.इसी बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने खड़े होकर बोलना शुरू किया. तब अन्य विपक्षी सदस्य शांत हो गये. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि लगातार दो-तीन सत्र के दौरान नेता विरोधी दल यानी उनका माइक ही बंद कर दिया जाता है. मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में बच्चियों पर जो अत्याचार हुए हैं, उसे देखते हुए धैर्य नहीं रखा जाता है. वह बच्चियों को न्याय दिलाना चाहते हैं.
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट लगातार दो दिनों से राज्य सरकार को फटकार लगा रही है, लेकिन मुख्यमंत्री जवाब तक नहीं दे रहे हैं. मामले की समुचित जांच नहीं करवा कर इससे जुड़े सबूत नष्ट किये जा रहे हैं. राज्य में अब तक हुए भ्रष्टाचार, घोटालों पर वे मौन रखे हुए हैं. जदयू के विधायक रंगदारी मांगते हैं. इन तमाम मुद्दों पर विपक्ष कार्य स्थगन लेकर आ रहा है और वे चाहते हैं कि मुख्यमंत्री सदन में आकर इन तमाम मामलों का जवाब दें.
उनके आरोप और संबोधन के बाद सदन में हंगामा होने लगा. इस पर अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने कहा कि कोई माइक बंद नहीं कर सकता.
आपके माइक पर तो विशेष ध्यान रखा जाता है और तकनीशियन से खासतौर से इसकी जांच करवायी जाती है. माइक किसका चलेगा, किनकी नहीं चलेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आसन से अनुमति लेकर कौन बोल रहे हैं. बिना अनुमति या अकारण बोलने वालों का माइक नहीं चलता है. जहां तक कार्य स्थगन स्वीकृत नहीं होने का सवाल है, तो कार्य स्थगन के लिए समय निर्धारित है. इसका पालन नहीं करने की स्थिति में यह स्वीकृत नहीं हो पाता है.
पेश हुआ बिहार विनियोग विधेयक
इस हंगामे और शोर-शराबे के बीच सदन के पटल पर बिहार विनियोग (संख्या-4) विधेयक, 2018 रखा गया. हालांकि, इस पर कोई चर्चा नहीं हो सकी. यह विधेयक 10 हजार 463 करोड़18 लाख 20 हजार रुपये की निकासी खजाने से करने से संबंधित है.
