पटना : गंदी होती जा रही गंगा, सीवरेज में 48% का इजाफा, नमामि गंगे के तहत 19 प्रोजेक्ट मंजूर, दस पर चल रहा काम

सेंट्रल पॉल्यूशन बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में दो सालों में रिकॉर्ड 451 एमएलडी सीवरेज अधिक बहा राजदेव पांडेय पटना : पटना सहित बिहार के पांच शहरों से गंगा में बहाये जा रहे सीवरेज में मात्र दो साल में करीब 48 फीसदी का इजाफा हुआ है. यह आंकड़ा बताने के लिए काफी है कि […]

सेंट्रल पॉल्यूशन बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में दो सालों में रिकॉर्ड 451 एमएलडी सीवरेज अधिक बहा
राजदेव पांडेय
पटना : पटना सहित बिहार के पांच शहरों से गंगा में बहाये जा रहे सीवरेज में मात्र दो साल में करीब 48 फीसदी का इजाफा हुआ है. यह आंकड़ा बताने के लिए काफी है कि अभी तक का गंगा निर्मल अभियान अप्रभावी रहा है.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2016 पोस्ट मॉनसून पीरियड में हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि बिहार से गंगा में महज 636़ 18 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे ) सीवरेज बह रहा था. वर्ष 2018 में प्री मॉनसून पीरियड में सीवरेज की मात्रा बढ़ कर 1087़ 18 एमएलडी हो गयी है. इस तरह करीब दो वर्षों में 451 एमएलडी (तुलनात्मक रूप में 48%) सीवरेज बढ़ा है.
गंगा में सीवर उड़ेलने वाले शहरों में पटना अव्वल है. यहां बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड) एवं सीओडी (बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) की मात्रा सामान्य से कई गुना अधिक हो गयी है.
यही वजह है कि बिहार के करीब-करीब किसी घाट का पानी बिना ट्रीटमेंट के पीना संभव नहीं रह गया है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक बिहार की सीमा में गंगा में पांच शहरों से 21 विभिन्न नालों से वर्ष 2018 में अब तक 1087 एमएलडी सीवरेज बहाया जा रहा है. इस कारण यहां बीओडी लोड दो साल पहले के स्तर 29़ 36 से बढ़ कर 39़ 47 टीपीडी हो गया है. पटना में छह घाट हैं, जहां से सबसे खतरनाक गंदा सीवर (इसमें मेडिकल एवं केमिकल युक्त सीवर भी शामिल है) सीधे गंगा में बहाया जा रहा है.
मॉनसून पूर्व 2018 में पटना के घाट
घाट सीवर बीओडी
की मात्रा (मिलीग्राम
(एमएलडी में) प्रति लीटर)
दीघा घाट 97.69 26
कुर्जी 98.77 40
राजापुर 178.69 36
बांस घाट 160 72
कलेक्ट्रेेट 30 65
मिट्टनघाट 17.22 88
पटना के घाट 2016 में
घाट सीवर बीओडी
की मात्रा (मिलीग्राम
(एमएलडी में) प्रति लीटर)
दीघा घाट 55.66 1.37
कुर्जी 81.46 1.2
राजापुर 123.42 5.06
बांस घाट 151.2 10.89
कलेक्ट्रेेट 36 2.59
मिट्टनघाट 4.38 0.29
सीधे नहीं पी सकते हैं गंगा का पानी
बेहतर पानी में बीओडी की मात्रा दो मिलीग्राम प्रति लीटर होना चाहिए. इससे अधिक होने पर इसे सीधे नहीं पिया जा सकता है. पटना के घाटों पर बीओडी की यह मात्रा इससे कई गुना अधिक है.
क्या है बीओडी
(बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड)
जल में अधिक मात्रा में मानव अपशिष्ट के मिल जाने से इनमें जीवाणुओं की संख्या बढ़ जाती है.इस प्रक्रिया के चलते पानी की गुणवत्ता में कमी आ जाती है. पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है. इससे बीओडी बढ़ जाता है, जिसके बढ़ने का अर्थ है कि पानी अधिक प्रदूषित है. इससे जलीय जीव भी प्रभावित होते हैं.
पटना : नमामि गंगे के तहत 19 प्रोजेक्ट मंजूर, दस पर चल रहा काम
पटना : गंगा नदी को स्वच्छ रखने के लिए वर्ष 2014 में आयी नरेंद्र मोदी सरकार ने 20 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) व नेटवर्क प्लान को मंजूरी दी. इनमें दस प्रोजेक्ट पर फिलहाल काम चल रहा है, जबकि चार टेंडर प्रक्रिया में अटकी है.
राजधानी के बेऊर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का दिसंबर में उद्घाटन किये जाने का लक्ष्य रखा गया है. सभी 20 एसटीपी प्रोजेक्ट पूरा हो जाने के बाद सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता 55 एमएलडी से बढ़ कर 529 एमएलडी हो जायेगी. मंगलवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी स्वयं बिहार के नमामि गंगे से जुड़े प्रोजेक्टों की समीक्षा करेंगे.
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इन 20 एसटीपी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने 4629.12 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. इससे गंगा नदी के किनारे वाले सभी 20 शहर लाभान्वित होंगे. इनमें छपरा, सोनपुर, दानापुर, पटना, फतुहा, बख्तियारपुर, बाढ़, मोकामा, बरौनी, बेगूसराय, मुंगेर, जमालपुर, सुल्तानगंज, भागलपुर, नवगछिया व कहलगांव शामिल हैं.
नमामि गंगे के तहत राजधानी पटना में बेऊर में 43 एमएलडी, सैदपुर में 60 एमएलडी, पहाड़ी में 60 एमएलडी, करमलीचक में 37 एमएलडी, कंकड़बाग में 50 एमएलडी और दीघा में 100 एमएलडी क्षमता के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाना है. इसके पूरा होने पर पटना की सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता 109 एमएलडी से बढ़ कर 286 एमएलडी तक हो जायेगी.

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