पटना : बिहार के तकरीबन साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों के समान वेतन पर बुधवार को दोपहर एक बजे से सर्वोच्च न्यायालय में एक बार फिर सुनवाई होगी. बुधवार को सुनवाई का अंतिम चरण है. जस्टिस अभय मनोहर सप्रे और उदय उमेश ललित की खंडपीठ में होने वाली सुनवाई के दौरान कोर्ट में शिक्षक संगठनों के वकील और केंद्र और राज्य सरकार के वकील अपना-अपना पक्ष रखेंगे. विदित हो कि पटना हाईकोर्ट ने पिछले वर्ष अक्टूबर में नियोजित शिक्षकों को अन्य शिक्षकों की भांति समान काम के बदले समान वेतन देने का फैसला दिया था, जिसके विरोध में राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय में अपील में गयी है.
इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने लगातार चली सुनवाई के क्रम में शिक्षक संगठनों, राज्य सरकार के साथ ही अटॉर्नी जनरल का पक्ष जान लिया है. पिछली सुनवाई के दिन कोर्ट ने तीनों पक्षों को तीन अक्टूबर की सुनवाई में अपनी बात समाप्त करने के निर्देश दिये थे. इससे पहले केंद्र सरकार ने बिहार सरकार का समर्थन करते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन का विरोध किया था. कोर्ट में केंद्र सरकार ने बिहार सरकार के स्टैंड का समर्थन किया था. केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर 36 पन्नों के हलफनामे में कहा गया था कि इन नियोजित शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतन नहीं दिया जा सकता क्योंकि समान कार्य के लिए समान वेतन के कैटेगरी में ये नियोजित शिक्षक नहीं आते. ऐसे में इन नियोजित शिक्षकों को नियमित शिक्षकों की तर्ज पर समान कार्य के लिए समान वेतन अगर दिया भी जाता है तो सरकार पर प्रति वर्ष करीब 36998 करोड़ का अतिरिक्त भार आयेगा. केंद्र ने इसके पीछे यह तर्क दिया था कि बिहार के नियोजित शिक्षकों को इसलिए लाभ नहीं दिया जा सकता क्योंकि बिहार के बाद अन्य राज्यों की ओर से भी इसी तरह की मांग उठने लगेगी.
