14 से 30 सितंबर तक पटना में होना है फिजिकल टेस्ट
पटना : सहरसा की लक्ष्मी (काल्पनिक नाम) ने बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग को प्रार्थना पत्र देकर दारोगा बहाली की शारीरिक जांच परीक्षा की तिथि आगे बढ़ाने की गुहार लगायी है. वह चार माह की गर्भवती है. डेहरी ऑन सोन की उर्मिला (काल्पनिक नाम) की भी कुछ यही परेशानी है.
वह पांच माह की गर्भवती है. यह कहानी केवल लक्ष्मी और उर्मिला की नहीं है, इस तरह की सौ से अधिक महिला अभ्यर्थी हैं. इन अभ्यर्थियों की शारीरिक जांच परीक्षा पटना के गर्दनीबाग के पटना हाईस्कूल में होनी है. इन महिला अभ्यर्थियोंने पीटी (प्रीलिम्स टेस्ट) और मेंस (मुख्य परीक्षा) पास कर लिया है. नौकरी पाने से बस एक कदम दूर हैं. अगर शारीरिक जांच परीक्षा में उन्होंने बाजी मार ली तो वर्दी पहनने का मौका मिल जायेगा. लेकिन, गर्भवती होने के कारण शारीरिक जांच परीक्षा में दौड़ना, उछलना व कूदना नामुमकिन है.
ऐसे में इन अभ्यर्थियों की सांसें लटकी हुई हैं. उधर, बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग इसको लेकर अब तक स्पष्ट कोई बयान जारी नहीं किया है. सूत्र बस इतना बताते हैं कि शारीरिक जांच परीक्षा स्थल पर सबका पहुंचना आवश्यक है. नहीं तो अनुपस्थित घोषित कर दिया जायेगा. दारोगा के 1717 पदों के लिए चार लाख 28 हजार 200 अभ्यर्थी पीटी में शामिल हुए थे. इनमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं. इनमें से 29 हजार 359 अभ्यर्थी पीटी में पास हुए.
इन लोगों ने मुख्य परीक्षा दी. इनमें 10 हजार 161 अभ्यर्थी ही सफल हो पाये. इनमें चार हजार से अधिक महिलाएं शामिल हैं. दरअसल, सरकार महिलाओं को 35% आरक्षण दे रही है. इसलिए सीधा हिसाब लगाएं तो चार हजार से अधिक संख्या महिला अभ्यर्थियों की होगी.
पिछले साल निकाला गया था विज्ञापन :
बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने दारोगा के 1717 पदों के लिए पिछले साल सितंबर-अक्तूबर में विज्ञापन निकाला था. इसमें स्पष्ट था कि पीटी और मेंस में सफल होने के बाद शारीरिक जांच परीक्षा होगी. इसमें दौड़ भी शामिल है. 30 नवंबर, 2017 तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गये. इसके बाद पीटी इस साल क्रमश: 11 मार्च और 15 अप्रैल को हुआ. इसी साल 22 जुलाई को मुख्य परीक्षा आयोजित की गयी थी.
बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग के पास प्रार्थना पत्रों का लगा ढेर
सेंटर पर पहुंचना भी आसान नहीं
जो महिला अभ्यर्थी गर्भवती हैं, उनके लिए शारीरिक जांच परीक्षा स्थल तक पहुंचना भी आसान नहीं होगा. नाम नहीं छापने की शर्त पर एक महिला अभ्यर्थी ने बताया कि डॉक्टर ने बेड रेस्ट के लिए कहा है. ऐसे में वह उपस्थिति दर्ज कराने के लिए गर्दनीबाग तक कैसे जा पायेंगी.
इसी तरह कुछ अन्य महिला अभ्यर्थियों ने कहा कि गर्भावस्था में बहुत सारी कठिनाइयां होती हैं. सबकी स्थिति एक सी नहीं होती. इसलिए आयोग को प्रार्थना पत्र देकर तिथि आगे करने की गुजारिश की गयी है. उधर, आयोग के सूत्र बताते हैं कि गर्भवती महिलाओं को दौड़ाया तो नहीं जा सकता. लेकिन, परीक्षा स्थल पर उनकी उपस्थिति अनिवार्य है. वहां मेडिकल की टीम होती है. अब जो निर्णय होगा, वहीं होगा. अभी कुछ नहीं का जा सकता.
कोर्ट का आदेश बना गले की फांस
सूत्रों ने बताया कि खाली पदों को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त है. सुप्रीम कोर्ट ने अक्तूबर तक भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का आदेश जारी किया था. इसी के तहत सरकार बहाली प्रक्रिया जल्द पूरी करने में जुटी है. परीक्षा कराने से लेकर परिणाम जारी करने तक का काम तेजी से हो रहा है.
अब गर्भवती महिला अभ्यर्थियों के कारण प्रक्रिया को रोकना सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना होगी. इस कारण आयोग ने अभी आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा है. उधर, महिला अभ्यर्थियों को भी अंदाजा नहीं था कि सबकुछ इतनी जल्दी हो जायेगा. भर्ती प्रक्रिया समय से निबटने की किसी को उम्मीद भी नहीं थी. पिछली बार भर्ती में चार साल का वक्त लगा था.
