बड़े शहरों के सुव्यवस्थित विस्तार पर गंभीर रुख की जरूरत
पटना : सूबे में बड़े शहरों के सुव्यवस्थित विकास को लेकर सरकारी महकमों में गंभीरता नहीं दिख रही. सरकार ने पटना महानगर सहित आठ शहरों का प्लानिंग एरिया (आयोजना क्षेत्र) तो तय कर दिया है, लेकिन उस एरिया में सुव्यवस्थित निर्माण को लेकर प्रयास नहीं किये जा रहे.
स्थिति यह है कि इन शहरों की प्लानिंग अथॉरिटी (आयोजना प्राधिकार) द्वारा सही ढंग से निगरानी नहीं होने के चलते अवैध निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है. इतना ही नहीं, पटना महानगर को छोड़ कर शेष आठ शहरों में प्लानिंग कमेटी (आयोजना समिति) भी गठित नहीं की जा सकी है.
सात प्लानिंग एरिया में एसडीओ को जिम्मेदारी
नगर विकास एवं आवास विभाग ने मई 2017 में गया, आरा, बिहारशरीफ, बोधगया, मुजफ्फरपुर, सहरसा और राजगीर के आस पास इलाकों को मिला कर प्लानिंग एरिया तय किया. इस प्लानिंग एरिया में व्यवस्थित ढंग से निर्माण व प्लानिंग के लिए करीब तीन महीने बाद प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में प्लानिंग अथॉरिटी का गठन भी किया गया. संबंधित एसडीओ को सदस्य सचिव बना कर उनको बिल्डिंग बायलॉज के हिसाब से नक्शा पास करने की जिम्मेदारी दी गयी है.
आयोजना क्षेत्रों में ऑनलाइन सुविधाएं नहीं
सभी शहरों के सुव्यवस्थित विकास को लेकर वर्ष 2013 में विकास आयुक्त की अध्यक्षता में बिहारी शहरी आयोजना तथा विकास बोर्ड का भी गठन किया गया. इस कमेटी ने पटना महानगर सहित अन्य प्लानिंग एरिया को संगठित करते हुए उनमें ऑनलाइन बिल्डिंग एप्रुवल सिस्टम के अंतर्गत सिंगल विंडो क्लियरेंस सहित अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था. लेकिन, मॉनीटरिंग के अभाव में प्लानिंग एरिया में इसकी सुविधा बहाल नहीं हो पा रही.
