छात्रों को सिर्फ डिग्री से करना पड़ता है संतोष
वोकेशनल कोर्स की आय से चल रहे कॉलेज व विवि
पटना : राज्य के विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में वोकेशनल कोर्स तो चल रहे हैं. लेकिन, उनमें प्लेसमेंट नाम की कोई चीज नहीं है. छात्र मोटी रकम देकर कोर्स करते हैं.
लेकिन, उसके बाद नौकरी के लिए उन्हें स्वयं पर निर्भर होना पड़ता है या फिर बेरोजगार ही रहना पड़ता है. स्थिति यह है कि कंपनियां इंटर्नशिप के लिए छात्रों को रखने से कतराती है. रोजगार तो दूर की बात है. कोर्स के बाद प्लेसमेंट के लिए कंपनियों से कॉलेज या विश्वविद्यालय का पहले से कोई टाइ-अप नहीं है. छात्रों को बस डिग्री भर से संतोष करना पड़ता है. यह स्थिति तब है जब वोकेशनल कोर्स से ही आज के समय में कॉलेजों व विवि का खर्चा चल रहा है. सामान्य कोर्स की फीस काफी कम है.
कैंपस प्लेसमेंट काफी कम, उंगलियों पर गिनी जा सकती है संख्या
जहां तक होता है, हमलोग प्रयास करते हैं कि कुछ कंपनियों से टाइ-अप कर काम किया जाये. करते भी हैं. कंपनियां अधिक इंटरेस्ट नहीं दिखाती है. अत: यहां नौकरी की काफी कमी है.
राजकिशोर प्रसाद, प्राचार्य, बीएन कॉलेज
पटना. पटना कॉलेज में वोकेशनल कोर्स के लिए जगह की काफी कमी है. इन पाठ्यक्रमों का संचालन दूसरे विभागों में हो रहा है. इसके लिए दो शिफ्ट में पढ़ाई करायी जा रही है. करीब एक दशक पहले वोकेशनल कोर्स के लिए भवन बनाये जाने का प्रस्ताव था लेकिन अब तक वह भवन बनकर तैयार नहीं हुआ है. यह भवन इकबाल हॉस्टल से सटे अरबी विभाग के ऊपर आधा बना नजर आता है. कब बनकर तैयार होगा, कोई नहीं जानता.
छात्रों को होती है दिक्कत : जगह की कमी से वोकेशनल कोर्स के छात्रों को काफी दिक्कत होती है. कई बार ऐसा हुआ कि वोकेशनल कोर्स की कक्षाएं परीक्षा भवन में चलानी पड़ी है. जिस कोर्स से कॉलेज को सबसे अधिक आर्थिक आय होती है, उन्हीं कोर्स के लिए कोई स्थायी विभाग ही नहीं है.
कॉलेज व विवि में भवन को लेकर विवाद : कॉलेज के भवन को लेकर काफी विवाद है. इसके लिए यूजीसी का फंड एक समय में आया था, उससे विवि के द्वारा काम कराया गया लेकिन फंड समाप्त होने के बाद काम को वहीं रोक दिया गया. काम का यूटिलाइजेशन रिपोर्ट भेजने में देरी और कुछ तकनीकी वजहों से अटक गया, यूजीसी से फिर फंड नहीं मिला.
कॉलेज में फंड की है कमी
वोकेशनल कोर्स के भवन के एक फ्लोर का अधिकतर काम हो चुका है. छत भी बनी हुई है बस उसे फर्निश करना बाकी है. कॉलेज के पास फंड की कमी है. इसके लिए हम यूनिवर्सिटी इंजीनियर को लिखेंगे. वोकेशनल कोर्स के पास काफी फंड है और वे चाहें तो यह काम हो सकता है.
प्रो एजाज अली अरशद, प्राचार्य, पटना कॉलेज
