पटना : मॉनसून के लगभग 66 दिन बीतने के बाद भी जिले में बारिश काफी कम हुई है. 15 जून से अब तक 463.6 एमएम बारिश हुई है, जबकि अब तक का औसत आंकड़ा 634.4 एमएम बारिश का है. यानी कुल 27 फीसदी की कमी दर्ज की गयी है. बारिश की औसत रफ्तार की बात करें, तो पूरे जिले में सीजन के दौरान तीन से चार बार ही जम कर बारिश हुई है. मौसम विभाग की मानें, तो अगले एक सप्ताह तक तेज बारिश के आसार नहीं हैं.
40 दिनों में पूरा करना होगा 50% का आंकड़ा
30 सितंबर तक मॉनसून का पूरा सीजन माना जाता है. ऐसे में अब सिर्फ 40 दिनों में ही बारिश के आंकड़े पूरे होने की आस है. पूरे सीजन में पटना जिले में 941.3 एमएम बारिश होती है. ऐसे में अब तक 50 फीसदी से भी कम बारिश हुई है. वहीं, पूरे बिहार में अब तक 559.8 एमएम बारिश हुई है. लेकिन, अब तक औसत बारिश का आंकड़ा 708.3 एमएम का है.
बारिश में गैप और बढ़े तापमान से बढ़ा
बिहार की सर्वाधिक अहम फसल धान के लिए इस साल का मौसम उपयुक्त साबित नहीं हो रहा है. अव्वल तो समय पर बरसात नहीं हुई. हुई भी तो बरसात में अंतराल इतना ज्यादा रहा है कि समय पर उसकी रोपनी तक संभव नहीं हो पायी. अब हालात और कठिन हो गये हैं.
क्योंकि, तापमान बढ़ा हुआ है. धान के लिए तापमान की उच्चतम सीमा 37 डिग्री सेल्सियस से पार हो चुकी है. प्रदेश में एक दो जगहों को छोड़ दिया जाये, तो उच्चतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस से अधिक चल रहा है. धान की उत्पादकता पर विपरीत असर पड़ने के अलावा खतरनाक कीटों का प्रकोप चरम पर पहुंच सकता है. दो-चार दिन में तापमान नहीं गिरा, तो फसलों के लिए हालात और खराब हो सकते हैं.
धान के लिए जरूरी तापमान की आदर्श स्थिति 25-36 डिग्री सेल्सियस : एक्सपर्ट के मुताबिक धान के लिए जरूरी तापमान की आदर्श स्थिति 25-36 डिग्री सेल्सियस है. वर्तमान में न्यूनतम तापमान भी 27 डिग्री सेल्सियस से अधिक ही चल रहा है. धान के लिए मौसमी दशाएं बेहद कठिन दौर में हैं. डाॅ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि की तरफ से जानकारी के मुताबिक जमीन का तापमान भी बढ़ा हुआ है.
सीजन में सबसे अच्छी बक्सर में
पूरे सीजन के दौरान सबसे अच्छी बारिश बक्सर जिले में हुई है. यहां अब तक 576.7 एमएम बारिश के मुकाबले 739.7 एमएम बारिश हुई है. यानी आंकड़ा 28 फीसदी अधिक का है. वहीं, राज्य में सबसे कम बारिश वैशाली जिले में हुई है. यहां अब तक औसत बारिश के मुकाबले 58 फीसदी कम बारिश हुई है.
बढ़ते तापमान का असर: सबसे पहले तना छेदक कीट का प्रकोप बढ़ना तय है. इससे धान की फसल कमजोर हो जायेगी. इसके साइड इफेक्ट मक्का पर भी देखे जायेंगे.
