पटना : शिक्षकों की सैलरी अन्य लोगों से कम क्यों?

पटना : नियोजित शिक्षकों से जुड़े समान काम, समान वेतन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से तल्ख प्रश्न करते हुए कई तरह की टिप्पणी की. गुरुवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए बहस को जारी रखा. इस दौरान […]

पटना : नियोजित शिक्षकों से जुड़े समान काम, समान वेतन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से तल्ख प्रश्न करते हुए कई तरह की टिप्पणी की. गुरुवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए बहस को जारी रखा.
इस दौरान कोर्ट ने कई सवाल पूछे मसलन कि आईएएस, इंजीनियर समेत अन्य सभी अधिकारियों की सैलरी ज्यादा है, तो शिक्षकों की सैलरी कम क्यों है? इस पर शिक्षा विभाग की तरफ से बहस कर रहे वकील ने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन का मामला इनके साथ कहीं से नहीं बनता है.
वहीं, दूसरी तरफ से शिक्षकों का पक्ष रखते हुए उनके वकील ने कहा कि इस मामले को जजों की पांच सदस्यीय खंडपीठ को सौंप देना चाहिए. इस पर कोर्ट ने कहा कि शिक्षक सम्मानित व्यक्ति हैं, उनके प्रति ऐसा व्यवहार क्यों है. इनकी सैलरी देने से संबंधित पूरे सिस्टम को सुधारने में कितना दिन लगेगा. ताकि सभी शिक्षक निश्चित होकर अपना काम कर सकें.
सुप्रीम कोर्ट का केंद्र के हलफनामे पर सवाल
नयी दिल्ली : बिहार के नियोजित शिक्षकों के समान काम समान वेतन के मसले पर सर्वोच्च न्यायालय में गुरुवार को भी सुनवाई हुई. न्यायाधीश एएम सप्रे और न्यायाधीश यूयू ललित की खंडपीठ के सामने राज्य सरकार ने पक्ष रखा. बिहार सरकार की ओर से दलील पेश करते हुए वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने पूर्व में दी गयी दलील को ही दोहराते हुए कहा कि समायोजित शिक्षकों को नियोजित शिक्षकों के बराबर वेतन नहीं दिया जा सकता है. दोनों की नियुक्ति प्रक्रिया अलग है और अगर ऐसा किया गया, तो राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा. उन्होंने कहा कि समायोजित शिक्षक समान काम के लिए समान वेतन के दायरे में नहीं आते हैं.
समायोजित शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया भी अलग है और राज्य सरकार की बजाय इनकी नियुक्ति पंचायत के द्वारा की जाती है. सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार के हलफनामे पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ बिहार और उत्तर प्रदेश में ही समायोजित शिक्षकों के वेतन को लेकर परेशानी क्यों है?
फंड की कमी दूसरे राज्यों में भी होनी चाहिए. अगर समान काम के लिए समान वेतन देने पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा, तो अदालत इस मामले पर तर्कसंगत फैसला करेगी. लेकिन, सिर्फ फंड की कमी के नाम पर शिक्षकों को अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता है. मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी.
इस दौरान शिक्षकों की ओर से दलील पेश की जायेगी. गौरतलब है कि पटना हाईकोर्ट द्वारा पिछले वर्ष नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान सुविधा देने के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है.

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