पटना : जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा है कि विरोधी दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव को ख्वाब और हकीकत का अब एहसास हो रहा है. वे बिहार में महागठबंधन का नेतृत्व करने निकले थे. स्थिति यहां तक आ गयी कि उनकी नेतृत्व क्षमता पर सहयोगियों को भी भरोसा नहीं रहा.
पिता की विरासत संभालने से कोई नेता नहीं बन जाता. राजनीतिक अनुकंपा के आधार पर सदन में स्थान अवश्य मिल सकता है लेकिन नेतृत्व क्षमता के लिए जनाधार का होना अति आवश्यक होता है. उन्होंने कहा कि तेजस्वी को उनके सहयोगी दलों ने ही अक्षम करार दिया है. महागठबंधन के अंदर अब तक उनके नेतृत्व को स्वीकार नहीं किया गया है.
सहयोगी दल के विधायकों को भी मालूम है कि उनमें राज्य के मुख्यमंत्री बनने योग्य योग्यता नहीं है. कहां वे निकले तो थे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मात देने पर उनके ही प्यादों की चाल से खुद उनको सह और मात मिल रही है. उनके पास चुप्पी के अलावा कोई विकल्प नहीं है. तेजस्वी दावा करते थे कि राहुल गांधी से सीधी मुलाकात होती है? अब क्या हुआ.
