नौकरी रहते ईपीएस का पैसा निकाला तो नहीं मिलेगी पेंशन

By Prabhat Khabar Digital Desk
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रिटायरमेंट के बाद के लिए है जरूरी निवेश
पटना : ईपीएफ खाते को लेकर अब तक आपको कई महत्वपूर्ण जानकारियां देने का प्रयास किया गया है. अब हम आपको ईपीएफ से जुड़ी कुछ अन्य बातें भी बतायेंगे जिससे ईपीएफ खातों को लेकर आपकी सभी दुविधाएं दूर जायेंगी. एक ईपीएफ खाताधारक को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, खासकर पेंशन को लेकर, इस विषय पर ईपीएफओ के आयुक्त से विस्तृत बातचीत हुई.
क्या है पीएफ खाता: कर्मचारी प्रॉविडेंट फंड (ईपीएफ) कर्मचारी भविष्य निधि अर्द्ध सरकारी और गैर सरकारी नौकरीपेशा लोगों के लिए महत्वपूर्ण जमा खाता है. पेंशन का लाभ अधिकांश नौकरियों में नहीं ही मिलता है और इसलिए रिटायरमेंट के बाद यह किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद जरूरी निवेश साबित होता है, जिसमें वह नौकरी के वर्षों में अंशदान करता है.
ईपीएफ और ईपीएस में अंतर: हर ईपीएफ खाताधारक को समझना चाहिए कि इसमें ईपीएस और ईपीएफ दो फंड होते हैं. ईपीएफ आपका प्रोविडेंट फंड होता है, जबकि ईपीएस आपकी पेंशन का हिस्सा होता है. ईपीएस यानी की पेंशन की राशि 58 साल की उम्र के बाद पेंशन के रूप में मिलती है. अगर नौकरी के दौरान ईपीएस का पूरा पैसा या टुकड़ों में निकाल लेते हैं, तो पेंशन का लाभ नहीं मिलता है. ईपीएफ में 12 फीसदी अंशदान कर्मचारी और 12 फीसदी अंशदान नियोक्ता द्वारा किया जाता है.
पेंशन 58 साल की उम्र में
ईपीएस से पेंशन 58 साल की उम्र से मिलती है, जबकि पीएफ का पैसा कर्मचारी अपनी बीमारी का इलाज, बेटे-बेटी की शादी, शिक्षा, मकान निर्माण आदि के लिए एडवांस के रूप में निकाल सकते हैं. सुपररेंशन से एक वर्ष पूर्व कर्मचारी अपने पीएफ जमा राशि का 90 फीसदी तक निकाल सकते हैं.
कब निकाल सकते हैं पीएफ : अगर दो महीने से बेरोजगार हैं, तो पीएफ से पैसे निकाल सकते हैं. पीएफ खाता खोलने के पांच साल के अंदर पैसे निकालने पर टीडीएस कटता है. वहीं पीएफ पर 8.65 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा.
यूएएन खाते को लिंक कराना जरूरी: ईपीएफ सदस्य अपने यूएएन खाते को अपने बैंक एकाउंट नंबर, पैन नंबर तथा आधार नंबर से लिंक करा लें, ताकि नौकरी छोड़ने की स्थिति में उन्हें नियोक्ता से अपने पीएफ फॉर्म को सत्यापित करवाने की आवश्यकता नहीं रह जाती है. नियोक्ता द्वारा केवाईसी अप्रूव होने पर सदस्य ऑनलाइन भी अपना पीएफ आवेदन कर सकते हैं.
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