आशुतोष कुमार पांडेय @ पटना
पटना : बिहार के अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं की तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं. नीतीश कुमार ट्वीटर और फेसबुक दोनों पर लगातार एक्टिव रहते हैं. हाल के दिनों में बिहार में उठे सियासी तूफान के बाद जिस तरह अन्य नेताओं नेएकदूसरे पर हमला बोलने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया. नीतीश कुमार उन नेताओं से सोशल मीडिया पर बिल्कुल अलग दिखते हैं. बिहार की सियासत में नीतीश कुमार की छवि अपने अलग सियासी स्टैंड और नैतिकता को सर्वोपरि रखकर सरोकार की राजनीति करने के लिए पहचानी जाती है.वहसार्वजनिक जीवन मेंतुरत-फुरतप्रतिक्रिया देने वाले नेताओं की श्रेणी में नहींआतेहैं. नीतीश कुमार के ट्वीटर और फेसबुक के पोस्ट का अध्ययन करने पर यह साफ दिखता है कि वह सोशल मीडिया साइट्स को पूरी तरहजनताके हित में सदुपयोग करने के पक्ष में दिखते हैं. उनकेसभी पोस्टअपनेआपमेंसूचना परकऔर जानकारी परक होने के साथ सामाजिकहोते हैं.
नीतीशकुमार सोशलमीडिया पर वहींबातेंपोस्ट करतेहैं, जो उनकी सरकार की योजनाओं और लोक कल्याण से जुड़ी होती हैं. साथ ही उनके पोस्ट पर किसी कार्यक्रम की जानकारी और उसकीउपयोगिताके बारे में विस्तार से बताया गया होता है. नीतीश कुमार के पोस्ट को देखते ही लोग प्रतिक्रियाके रूप में जवाब और सवाल करने की वजाए एक सधी हुई सुझाव वाली प्रतिक्रिया देना ज्यादा पसंद करते हैं. नीतीश कुमार ने ट्वीटर पर सबसे ताजा पोस्ट 16 घंटे पहले डाला है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि आइएएस वाइफ एसोसिएशन की ओर से उन्हें मुख्यमंत्री राहत कोष में 2.5 लाख रुपये का चेक प्रदान किया गया. वहीं उन्होंने आइपीएस वाइफ एसोसिएशन की ओर से दिये गये एक लाख रुपये के चेक का भी जिक्र किया है. उन्होंने बिहार विधानसभा सदस्यों द्वारा प्रदान किये गये चेक का भी जिक्र किया है.
उसके बाद अगला पोस्ट उनका बाढ़ राहत कार्य, विधि एवं व्यवस्था के साथ त्योहारों की तैयारी के अलावा शराबबंदी की समीक्षा हेतु अधिकारियों के साथ तस्वीरों वाला पोस्ट डाला गया है. विधान पार्षद देवेश चंद्र ठाकुर द्वारा मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए गये चेक का भी जिक्र किया गया है. उन्होंने गया में नेपाल के प्रधानमंत्री श्री शेर बहादुर देउबा के साथ मुलाकात की तस्वीर भी ट्वीटर पर पोस्ट की है और मगध प्रमंडल के आयुक्त द्वारा मुख्यमंत्री राहत कोष में दिये गये चेक का जिक्र किया है. गया में दशरथा मांझी महोत्सव के उद्घाटन का जिक्र भी उन्होंने ट्वीटर पर किया है. उन्होंने फेसबुक पर भी कमोबेश ट्वीटर वाले पोस्ट को ही पोस्ट किया है. मुख्यमंत्री ने अन्य बातों को पोस्ट करने से ज्यादा बाढ़ राहत और बाढ़ राहत आपदा में मिलने वाली सहयोग राशि को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना ज्यादा जरूरी समझा है.
नीतीश कुमार के इतर बिहार की सियासत में अन्य बड़े नेताओं के ट्वीटर और फेसबुक हैंडल की बात करें, तो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ट्वीटर और फेसबुक का इस्तेमाल सबसे ज्यादा अन्य पार्टियों के अलावा नीतीश कुमार और केंद्र सरकार पर हमले के लिए करते हैं. लालू यादव ने महागठबंधन टूटने के बाद से सभी ट्वीट या तो नीतीश कुमार पर हमला करते हुए लिखा है, या फिर केंद्र की मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पोस्ट किया है. वहीं दूसरी ओर पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपने ट्वीटर एकाउंट पर अपने जनादेश अपमान यात्रा की तस्वीर और वीडियो को पोस्ट किया है, जबकि लालू ने छाती पर सांप लोटने से लेकर रैली में भीड़ और भाजपा नेताओं पर हमले वाले ट्वीट को तरजीह दिया है.
भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने ट्वीटर पर सरकार की योजनाओं के साथ जानकारी के अलावा लालू और तेजस्वी को जवाब देने के लिए भी कई बार ट्वीट किया है. सुशील मोदी फेसबुक पर भी सरकारी कार्यक्रमों के अलावा योजनाओं की जानकारी को शेयर करना पसंद करते हैं. फेसबुक पर नीतीश कुमार के फॉलोवरों की संख्या जहां 14 लाख 79 हजार 317 है. वहीं, लालू यादव के फॉलोवरों की संख्या 9 लाख 96 हजार 64 है, जबकि तेजस्वी यादव के समर्थकों की संख्या 8 लाख 32 हजार 858 है. कुल मिलाकर सोशल मीडिया का इस्तेमाल सबसे सार्थक तरीके से सीएम नीतीश कुमार करते हैं.वहलगातार सोशल मीडिया को बिल्कुल सोशल तरीके सेउपयोगकर रहे हैं.
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