लालू की बेनामी संपत्ति पर CBI रेड का असली कारण है 2008 का यह प्रेस कांफ्रेंस

पटना : बिहार में सियासी पारा इन दिनों अपने परवान पर है. शुक्रवार को सीबीआई ने पटना, रांची, पुरी सहित भुनेश्वर और गुरुग्राम में लालू यादव के ठिकानों पर छापेमारी की. उसके तत्काल बाद सियासी गलियारे में यह हलचल तेज हो गयी कि इसके पीछे सुशील मोदी की ओर से लालू परिवार पर बेनामी संपत्ति […]

By Prabhat Khabar Print Desk | July 8, 2017 1:49 PM

पटना : बिहार में सियासी पारा इन दिनों अपने परवान पर है. शुक्रवार को सीबीआई ने पटना, रांची, पुरी सहित भुनेश्वर और गुरुग्राम में लालू यादव के ठिकानों पर छापेमारी की. उसके तत्काल बाद सियासी गलियारे में यह हलचल तेज हो गयी कि इसके पीछे सुशील मोदी की ओर से लालू परिवार पर बेनामी संपत्ति को लेकर किये जा रहे हमले जिम्मेवार हैं. वहीं सुशील मोदी ने तत्काल मीडिया में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इसके लिए नीतीश कुमार को धन्यवाद देते हैं. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने जो आरोप लगाये थे, वह साबित हो गये हैं. सुशील मोदी के इस बयान के पीछे की कहानी का सच आज भी जिंदा है.लालूपर रेल मंत्री रहते बेनामी संपत्ति बनाने का आरोप सुशील मोदी से भी पहले, वर्तमान में महागठबंधन में लालू की पार्टी के सहयोगी बने जदयू के नेता दस साल पहले लगा चुके हैं.

इन दो नेताओं ने लगाया था आरोप

दरअसल, छापेमारी के बाद सुशील मोदी ने यह भी कहा कि यह उनका आरोप थोड़े ही है? यह तो जदयू के तत्कालीन दो नेताओं, शिवानंद तिवारी और ललन सिंह ने लालू यादव पर लगाये थे. जी हां, यह घटना 12 अगस्त 2008 की है. उस वक्त दोनों नेताओं ने मिलकर लालू यादव पर रेलवे में नौकरी के बदले बेनामी संपत्ति बनाने का गंभीर आरोप लगाया था. उनमें शामिल थे, जदयू के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान में बिहार सरकार में मंत्री ललन सिंह और पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद शिवानंद तिवारी. उस वक्त भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही थे. नीतीश कुमार बिहार में एनडीए के समर्थन से सरकार चला रहे थे. राजनीतिक घटनाक्रम को ध्यान से देखें, तो कुछ जानकार मानते हैं कि जदयू नेताओं द्वारा उस वक्त लगाये गये आरोपों का खामियाजा अब लालू को भुगतना पड़ रहा है और सुशील मोदी की बात में दम है.

2008 में हुआ था प्रेस कांफ्रेस

मंगलवार, 12 अगस्त 2008 कायहदिन काफी चर्चा में आया था. उस वक्त जदयू प्रदेश कार्यालय में ललन सिंह और शिवानंद तिवारी ने एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया. उस संवाददाता सम्मेलन में दोनों नेताओं ने लालू के खिलाफ 600 पेजों का दस्तावेज जारी किया था. दोनों नेताओं ने लालू परिवार पर जमीन घोटाले का आरोप लगाते हुए, तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह से तुरंत जांच की मांग की थी. दोनों नेताओं ने यह कहा था कि लालू को तत्काल रेल मंत्री के पद से बरखास्त कर, मामले की उच्चस्तरीय जांच करायी जाये. उस कांफ्रेंस में राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा था कि गत चार सालों में रेलवे में नौकरी देकर लालू 100 एकड़ जमीन के मालिक बन गये हैं. ललन ने पत्रकारों को जमीन के कागजदिये और कहा कि लालू ने चारा घोटाला से सबक नहीं सिखा है.

शिवानंद ने किया था लालू पर बड़ा हमला

इस संवाददाता सम्मेलन में शिवानंद तिवारी ने यहां तक कहा था कि यदि लालू देश के प्रधानमंत्री होते, तो देश को ही बेच देते. दोनों नेताओं ने जो मीडिया को कागजात सौंपे उसमें 2004 से 2008 तक के जमीन रजिस्ट्री के कागजात थे. ललन सिंह ने कहा था कि लालू ने रेलमंत्री बनने के बाद बेनामी संपत्ति जमा करने का नया तरीका ईजाद किया है. इस मामले को जदयू ने कुछ इस कदर से उछाला था कि ललन सिंह ने केंद्र सरकार को कार्रवाई करने के लिए मात्र 15 दिन का समय दिया था. राजनीतिक जानकारों की मानें तो ललन सिंह द्वारा दिये गये दस्तावेजों और हाल में सुशील मोदी द्वारा जमीन रजिस्ट्री के कागजातों में काफी समानताएं हैं. ज्ञात हो कि लालू परिवार पर बेनामी संपत्ति को लेकर अभी आयकर विभाग और सीबीआई की नजरें सख्त हुई हैं और इसे लेकर बिहार की सियासत पूरी तरह गरमायी हुई है.

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