बिहार सरकार की प्रारूप कृषि रोडमैप पर ग्रीनपीस ने अपना फीडबैक प्रधान सचिव को सौंपा

पटना: बिहार सरकार की प्रारूप कृषि रोडमैप पर ग्रीनपीस ने आज अपना फीडबैक कृषि विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार को सौंपा. पर्यावरण पर काम करने वाली संस्था ग्रीनपीस ने बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित तीसरे कृषि रोडमैप (2017-22) का स्वागत करते हुए उम्मीद जतायी कि यह जैविक बिहार के सपने को साकार करने की दिशा […]

पटना: बिहार सरकार की प्रारूप कृषि रोडमैप पर ग्रीनपीस ने आज अपना फीडबैक कृषि विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार को सौंपा. पर्यावरण पर काम करने वाली संस्था ग्रीनपीस ने बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित तीसरे कृषि रोडमैप (2017-22) का स्वागत करते हुए उम्मीद जतायी कि यह जैविक बिहार के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा.

ग्रीनपीस के सीनियर कैंपेनर इश्तियाक अहमद ने कहा, प्रस्तावित रोडमैप में ऐसे कई प्रावधान हैं जो कृषि-रसायनों पर किसानों की निर्भरता और किसानों के खर्च को कम करने और मिट्टीव पर्यावरण से संरक्षण में सहायक साबित होंगे. उन्होंने संकटग्रस्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि के इस दौर में बिहार सरकार द्वारा किसानों को आत्म-निर्भर बनाने और उनकी आय को बढ़ाने को रोडमैप का लक्ष्य बनाना सराहनीय है.’

इश्तियाक अहमद ने आगे कहा कि हर जिले में एक गांव को आदर्श जैविक ग्राम के रूप में विकसित करने, 9 जिलों में जैविक सब्जी उत्पादन सहित जैविक खेती कॉरिडोर बनाने का लक्ष्य मत्वाकांक्षी तो है पर असाध्य नहीं है, इसे जमीन पर उतारने के लिये ठोस रणनीति, पारदर्शी और सतर्क क्रियान्वयन की आवश्यकता होगी.’

संस्था ने अपने फीडबैक में दिया यह सुझाव
संस्था ने अपने फीडबैक में सुझाव दिया है कि रोडमैप में मौजूद उन तमाम प्रावधानों को एक जगह जैविक बिहार मिशन के तहत लाया जाए जो किसानों को जैविक खेती अपनाने में सहायक हो सकते हैं. कुछ नये प्रावधान जोड़े जाएं जिनसे बायोमॉस को संरक्षित करने और उसे उत्तम और सुरक्षित कुदरती खाद में बदलने में मदद मिल सके, जैसे पक्का पशुफर्श एवं पशुमूत्र संग्रहण टंकी, अजोला टंकी, अमृत पानी व जीवामृत निर्माण टंकी आदि. ग्रीनपीस ने सभी चिन्हित गांव और कॉरिडोर में एकल-खिड़की आवेदन क्लियरेंस सिस्टम को लागू करने की मांग भी की है, जिससे किसान आसानी से एक ही टेबल पर सारी प्रक्रिया पूरी कर इस योजना का लाभ ले सकें.

इस रोडमैप में संस्था ने किसानों, किसान सलाहकार और संबंधित विशेषज्ञों के लिये लगातार प्रशिक्षण प्रक्रिया चलाने को भी महत्वपूर्ण बताया है. इसमें कृषि से संबंधित सभी संस्थानों में जैविक खेती पर अलग से विभाग बनाने, रिसर्च को बढ़ावा देने और जैविक किसान समागम जैसे कार्यक्रम को चलाने पर जोर दिया. जहां जैविक खेती से जुड़े ज्ञान, अनुभव और नये प्रयोगों को साझा किया जा सके.

फीडबैक में रोडमैप में बाजार को जैविक खेती से जोड़ने का स्वागत करते हुए सलाह दी गयी है कि जैविक उत्पादकों को प्रखंड से लेकर राज्य स्तर तक जैविक उत्पाद मंडी में एक चेन से जोड़ने की जरुरत है. साथ ही, समय-समय पर रोडमैप में शामिल नीतियों की समीक्षा करने और उसे लागू करने की प्रक्रिया को भी मजबूत करने की सलाह दी गयी है.

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