Nawada Progressive Writers Association : प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) नवादा का आठवां जिला सम्मेलन रविवार को नगर के अंबेडकर पुस्तकालय भवन में आयोजित किया गया. कथाकार मिथिलेश सभागार में आयोजित सम्मेलन में साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों और एक्टिविस्टों ने भाग लिया. सम्मेलन दिवंगत प्रलेस साथियों मिथिलेश, जयप्रकाश, प्रो. उमाकांत राही और डॉ. संजय कुमार सिन्हा को समर्पित रहा.
इप्टा कलाकारों ने प्रस्तुत किए शहीद गीत
सम्मेलन की शुरुआत इप्टा के कलाकार उपेंद्र शर्मा, पप्पू कुमार पाण्डेय और सहदेव पासवान के शहीद गीतों की प्रस्तुति से हुई. कार्यक्रम की अध्यक्षता नरेंद्र प्रसाद सिंह ने की, जबकि संचालन जिला सचिव अशोक समदर्शी ने किया.
लोकभाषिक चेतना पर हुई चर्चा
सीपीआई जिला मंत्री डॉ. जयनंदन प्रसाद सिंह और सम्मेलन के पर्यवेक्षक गया प्रलेस के अरुण हरलीवाल ने साहित्य सृजन में लोकभाषिक चेतना के महत्व पर चर्चा की. वक्ताओं ने साहित्य और समाज के बीच संबंध तथा जनजीवन से जुड़े विषयों पर साहित्य सृजन की भूमिका पर विचार रखे.
साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों ने रखे विचार
सम्मेलन में कार्यकारी अध्यक्ष शंभू विश्वकर्मा, कृष्ण कुमार भट्टा, जयराम सिंह, चंद्रमौली कुमार, द्वारिका प्रसाद, संजीव हिंदुस्तानी, अर्जुन सिंह, दिनेश अकेला और नरेंद्र नलिन ने अपने विचार रखे. मंचासीन अतिथियों में अवधेश कुमार, पारस सिंह, प्रो. बच्चन कुमार पाण्डेय, उमाकांत सिंह अधिवक्ता और डॉ. मदन कुमार शामिल रहे.
11 सदस्यीय कार्यकारिणी का गठन
सम्मेलन के संगठन सत्र में 11 सदस्यीय जिला कार्यकारिणी का गठन किया गया. नरेंद्र प्रसाद सिंह को पुनः अध्यक्ष, शंभू विश्वकर्मा को कार्यकारी अध्यक्ष, अशोक समदर्शी को जिला सचिव, सुरेंद्र कुमार सिद्धार्थ को संयुक्त सचिव और उमाकांत सिंह अधिवक्ता को कोषाध्यक्ष चुना गया.
कार्यकारिणी में इन सदस्यों को मिली जगह
नई कार्यकारिणी में वंदना शर्मा, गौतम कुमार सरगम, निशा कुमारी, सुनील कुमार और चंद्रमौली कुमार को शामिल किया गया. सम्मेलन में संगठन को मजबूत करने और साहित्यिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई.
काव्य सम्मेलन में कवियों ने पढ़ीं मौलिक रचनाएं
सम्मेलन के दौरान काव्य सम्मेलन का भी आयोजन किया गया. इसमें धनंजय कुमार पाण्डेय, दशरथ प्रसाद, संजय कुमार और द्वारिका प्रसाद समेत अन्य कवियों ने अपनी मौलिक रचनाओं का पाठ किया. कवियों की प्रस्तुतियों को साहित्यप्रेमियों ने सराहा.
