ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपि खोज जारी
पांचू संगत और सोनसा गांव में मिलीं प्राचीन कृतियांकैप्शन- हिसुआ पांचू संगत में रखा गया गुरुग्रंथ साहेब, साथ हैं बीडीओ व महंत.
प्रतिनिधि, हिसुआज्ञान भारतम मिशन के तहत प्रखंड में प्राचीन पांडुलिपियों की खोज के दौरान कई महत्वपूर्ण सफलताएं मिली हैं. इसी कड़ी में बीडीओ ने हिसुआ-नवादा रोड स्थित पांचू उदासीन संगत का दौरा किया, जहां 500 से अधिक पन्नों का हस्तलिखित गुरुग्रंथ साहेब मिला. यह ग्रंथ पंजाबी भाषा की गुरुमुखी लिपि में है और अत्यंत पौराणिक माना जा रहा है. महंत अर्जुन दास के अनुसार, यहां आज भी प्राचीन परंपरा से अरदास और पाठ होता है. बीडीओ ने इसे पोर्टल पर निबंधित करा दिया है. खोज के दौरान सोनसा गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक सैय्यद इम्तेयाज हुसैन के पास से डेढ़ सौ वर्ष पुरानी हस्तलिखित मर्सिया मिली है. फारसी भाषा में लिखित यह पांडुलिपि लगभग 150 पन्नों की है, जिसे सुरक्षित करने के लिए निबंधित किया गया. इससे पूर्व नंदलाल बिगहा में भी हस्तलिखित गुरुग्रंथ साहेब के अंश मिले थे.
बीडीओ की अपील : सहेजें ऐतिहासिक धरोहर
बीडीओ ने बताया कि भोजपत्र, ताड़पत्र, कपड़ा या कागज पर लिखित कम से कम 75 वर्ष पुरानी पांडुलिपियों को सहेजने की सरकार की मुहिम है. उन्होंने प्रखंड वासियों से अपील की है कि वे क्षेत्र की दुर्लभ धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक लेखनी को बचाने में सहयोग दें.
