पुआल से बनाया गया पंडालरजौली. प्रखंड के अमावां गांव में भगवान सूर्य भास्कर की प्रतिमा का पूजा अर्चना की जाती है. यह प्रतिमा नवयुवक बाल समाज मंडली के लोगों द्वारा मठ के शिवाला पर स्थापित किया जाता है. यह पूजा 1998 से ही होते आ रहा है. सूर्य नारायण अपने सात घोड़ों पर सवार रहते हैं. प्रतिमा के आगे एक छोटा सा तालाब में व्रती की भी प्रतिमा बनी रहती है. इसमें एक छोटा सा बालक अर्ध देते हुए सूर्य भगवान के सामने रहता है. इस इस वर्ष बाल समाज के लोग पूरे पंडाल में पुआल से कुटिया बनाया है. उसी पुआल के कुटिया में भगवान सूर्य की प्रतिमा दिखेगा. अमावां गांव के सभी छठ व्रती महिलाओं तालाब में भगवान सूर्य नारायण का अर्घ देते हैं. भगवान की प्रतिमा पूजा करते हैं. सूर्य भगवान का पूजा पहली अर्घ की रात में किया जाता हैं. सुबह में छठ व्रती को पहला प्रसाद यही पर दिया जाता है. पहला प्रसाद सूर्य नारायण मंदिर में प्राप्त होता है. यहां के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ही पूजा करते आ रहे हैं. उन्हें ग्रामीण युवा प्रमोद कुमार, दीपक कुमार, संजय सिंह, बसंत रजक, श्रीकांत सिंह, मुकेश कुमार आदि का सहयोग हमेशा मिलता है.
पुआल से बनाया गया पंडाल
पुआल से बनाया गया पंडालरजौली. प्रखंड के अमावां गांव में भगवान सूर्य भास्कर की प्रतिमा का पूजा अर्चना की जाती है. यह प्रतिमा नवयुवक बाल समाज मंडली के लोगों द्वारा मठ के शिवाला पर स्थापित किया जाता है. यह पूजा 1998 से ही होते आ रहा है. सूर्य नारायण अपने सात घोड़ों पर सवार रहते […]
