जनता के भरोसे पर खरा उतरुंगी : अरुणा फोटो-6 डीवारिसलीगंज. पहली बार वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में निदर्लीय प्रत्याशी के रूप में चुनी गयी थीं. इन्हें लगातार दो बार हार का सामना पड़ा. हालांकि, इन वर्षों में कई पार्टियों से नाता रहा. इस बार इन्होंने भाजपा का दामन थामा और विजय मिली. इन 10 वर्षों में क्षेत्र के हालात बदले हैं. पर, जन आकांक्षाएं घटी नहीं है. मसला चीनी मिल का हो या फिर रेफरल अस्पताल के नियमित संचालन का. किसानों के लिए पौरा नहर की नये सिरे से उड़ाही भी अब अहम हो गया है. बावजूद मिली जीत से नवनिर्वाचित विधायिका अरुणा देवी उत्साहित हैं. इसके लिए जनमत का सम्मान करते हुए आभार जताया है. प्रभात खबर ने उनसे उनकी भावी योजनाआें पर बातचीत की. सवाल- जीत के बाद क्षेत्र के विकास की प्राथमिकता क्या होगी?जबाव- सरकार की जनोपयोगी योजनाओं का लाभ समाज के वंचित तबकों तक सुलभतापूर्वक पहुंचाना. वैसे सभी समुदायों का मत मुझे मिला है. राज्य सरकार के पास मजबूती से क्षेत्र की समस्याओं को उठाया जायेगा. क्षेत्र की बुनियादी जरूरतों पर नजर रहेगी. पिछले 10 सालों में विकास का कोई काम नहीं हुआ है. सत्ता में होने के बाद भी यहां के लोग विकास से वंचित रहे हैं. मूल रूप से यही मेरी जीत का कारण भी बना है. लिहाजा लोगों की अपेक्षाएं बढ़ी है.सवाल- एनडीए की सरकार नहीं बन रही है. ऐसी स्थिति में जड़वत बनी समस्या का निबटारा कैसे होगा?जबाव- काम तो मुश्किल है. जनता ने बिहार में विकास विरोधी जनमत दिया है. परंतु, इतना जरूर है कि मूलभूत समस्याओं का निराकरण करने में नहीं चुकूंगी. यह अलग है कि वर्षों से जड़वत बनी मुख्य समस्याओं के निबटारे में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी. सवाल- क्षेत्र की मुख्य समस्या चीनी मिल है. इस दिशा में आप कहां तक सफल होंगी?जबाव- चीनी मिल जैसे बड़े उद्योग को पुनर्जिवित करने का अधिकार राज्य सरकार को है. पिछले 10 वर्षों से सत्ता में रहे प्रतिनिधि जब चीनी मिल नहीं खुलवा सके तो मैं कहां तक सफल होउंगी. फिर भी संघर्ष के जरिए एक भी अवसर को नहीं छोड़ूंगी. सवाल- आम लोगों की मूलभूत समस्याओं का निराकरण कैसे करेंगी? जबाव- क्षेत्र के प्रबुद्धजनों के सहयोग व युवाओं की सम्मिलित भागीदारी के साथ इसका निराकरण किया जायेगा.
जनता के भरोसे पर खरा उतरुंगी : अरुणा
जनता के भरोसे पर खरा उतरुंगी : अरुणा फोटो-6 डीवारिसलीगंज. पहली बार वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में निदर्लीय प्रत्याशी के रूप में चुनी गयी थीं. इन्हें लगातार दो बार हार का सामना पड़ा. हालांकि, इन वर्षों में कई पार्टियों से नाता रहा. इस बार इन्होंने भाजपा का दामन थामा और विजय मिली. इन 10 […]
