हिसाब-किताब के लिए माना जाता है शुभ

हिसाब-किताब के लिए माना जाता है शुभ दीपावली. धन की देवी लक्ष्मी की पूजा में खाता-बही बदले की परंपरा हैदुकानों में 20 से 250 रुपये तक तक है उपलब्ध झारखंड से आये कारीगर करते हैं निर्माण फोटो-8प्रतिनिधि, नवादा (नगर)दीपावली में होनेवाली धन की देवी लक्ष्मी की पूजा में संस्थानों में खाता-बही बदले की परंपरा है. […]

हिसाब-किताब के लिए माना जाता है शुभ दीपावली. धन की देवी लक्ष्मी की पूजा में खाता-बही बदले की परंपरा हैदुकानों में 20 से 250 रुपये तक तक है उपलब्ध झारखंड से आये कारीगर करते हैं निर्माण फोटो-8प्रतिनिधि, नवादा (नगर)दीपावली में होनेवाली धन की देवी लक्ष्मी की पूजा में संस्थानों में खाता-बही बदले की परंपरा है. छोटे व बड़े सभी दुकानों व संस्थानों में नये बही खाते शुरू किये जाते हैं. पूजा को लेकर बही-खातों का बड़ा बाजार जिला में मौजूद है. आधुनिकता के बावजूद पारंपरिक लाल कवर में बने पीले रंग के कागज की बही को लक्ष्मी पूजा में पूजन कर वर्ष भर हिसाब किताब करने में इस्तेमाल किया जाता है. जिला में कई मुसलिम कारीगर इस खाता-बही को बनाने में जुटे रहते हैं. नगर के स्टेशन रोड में विशेष रूप से झारखंड से आये कारीगर बही-खाता बनाते है. दुकानों में 20 रुपये से लेकर 250 रुपये तक का बही-खाता उपलब्ध है. दीपावली को लेकर इसकी खरीदारी तेज हो गयी है. आधुनिकता के बावजूद कायम है परंपरानये समय में हिसाब-किताब को अब कंप्यूटर के माध्यम से संचालित किया जाता है. परंतु, सोना-चांदी की दुकान, गल्ला व्यवसायी, फल व सब्जी मंडी, बड़ी एजेंसियों के संचालकों व दुकानदारों आदि के यहां अनिवार्य रूप से बही-खातों की पूजा होती है तथा इसका इस्तेमाल भी वर्ष भर हिसाब-किताब रखने के लिए किया जाता है. वैसे तो कई बड़े व्यापारी अब कंप्यूटर के माध्यम से ही अपने आय-व्यय व अन्य स्टॉक का हिसाब-किताब करते है. परंतु, इन व्यापारियों द्वारा भी अनिवार्य रूप से बही-खाते का इस्तेमाल किया जाता है. हर रेंज में है उपलब्धबही-खाते का हर रेंज बाजार में उपलब्ध है. 20 रुपये, 50 रुपये, 100 रुपये, 150 रुपये, 200 रुपये, 250 रुपये सभी रेंज के बही खाते बाजारों में बिक रहे हैं. दीपावली को लेकर दुकानदारों ने भी अलग-अलग रेंज के आइटम बाजारों में उतारे हैं.सीजनल काम हैदीपावली के समय ही खाता-बही की बिक्री होती है. वैसे तो यह सीजनल काम है. लेकिन, स्टॉक रहने पर सामान्य दिन भी खाता-बही की डिमांड रहती है. स्थानीय स्तर पर कई कारीगर खाता-बही बनाने का काम करते हैं. अब रेडिमेड खाता-बही बाजार में मिल रहा है. -अरविंद कुमार, किताब दुकानदार

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