मजदूरी का हो रहा गोल-माल

मजदूरी का हो रहा गोल-माल मजदूर कर रहे पलायनधमौल. इन दिनों मनरेगा मजदूर भूखे मरने को विवश है़ं उन्हें स्थानीय स्तर पर काम नहीं मिलने के कारण दूसरे प्रदेशों में जाना पड़ रहा है. जानकारी के मुताबिक, मनरेगा के तहत काम करनेवाले मजदूरों को तीन माह से मजदूरी नहीं मिली है़ इससे कारण वह पलायन […]

मजदूरी का हो रहा गोल-माल मजदूर कर रहे पलायनधमौल. इन दिनों मनरेगा मजदूर भूखे मरने को विवश है़ं उन्हें स्थानीय स्तर पर काम नहीं मिलने के कारण दूसरे प्रदेशों में जाना पड़ रहा है. जानकारी के मुताबिक, मनरेगा के तहत काम करनेवाले मजदूरों को तीन माह से मजदूरी नहीं मिली है़ इससे कारण वह पलायन करने को विवश हैं. स्थानीय मुखिया सुनैना देवी ने बताया कि चार माह से मजदूरों को मजदूरी नहीं दी गयी है. प्रोग्राम ऑफिसर की मनमानी से मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है़ इसके कारण हर-एक दिन 10 से 12 मजदूर दूसरे शहरों में पलायन कर रहे हैं. गौरतलब है कि सरकार द्वारा मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए मनरेगा योजना चलायी थी. पर, कर्मियों की मनमानी से यह बेअसर होता दिखाई पड़ रहा है. इधर, अवधेश सिंह, रोशन कुमार, कन्हाई चौहान, कुलदीप मांझी आदि ने बताया कि मजदूरी के लिए कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है. चार माह से हम सब को मजदूरी नहीं दिया जा रहा है. इधर, प्रोग्राम ऑफिसर नीतीश कुमार से जब मोबाइल से बात किया गया, तो इन्होंने बाद में बात करने कि बात कह टाल दिया.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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