नवादा कार्यालय: आइआइटी के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा निकालने के लिए बच्चों को काफी संघर्ष करना पड़ता है. खासकर छोटे शहरों व गांवों में रहने वाले बच्चों के लिए संसाधन की कमी उनके इस पढ़ाई में अक्सर बाधा उत्पन्न करती है. नौवीं कक्षा से ही आइआइटी की तैयारी शुरू करना बेहतर होता है. ऐसे बच्चों के लिए इस जिले के एक होनहार आइआइटीयन रितेश कुमार है. रितेश 2013 में रैंकिंग में 53वां स्थान प्राप्त किया था. वह छुट्टियां बिताने नवादा आया था.
इस दौरान 15 दिन तक शहर के होनहार बच्चों को सफलता प्राप्त करने टिप्स दिया. एसकेएम कॉलेज में रितेश कुमार ने 28 जून से 14 जुलाई तक नौवीं से 12 वीं कक्षा तक के बच्चों को प्रेरित किया. उन्होंने बताया कि देश भर के 40 हजार आइआइटी छात्रों की विदेश जाने के लिए परीक्षा ली गयी. उसमें पांच छात्रों को चुना गया. चुने गये छात्रों में वह दूसरा स्थान प्राप्त किया.
प्रशिक्षण के दौरान कॉलेज प्रशासन ने भी पूरा सहयोग दिया. कॉलेज के प्राचार्य देवेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि यह सौभाग्य है हमारे कॉलेज में इस तरह का आयोजन हुआ.
डॉ केबी शर्मा ने भी ऐसे कार्यो के लिए हर संभव मदद देने के साथ सराहना की. प्राचार्य श्री सिन्हा ने बताया कि कॉलेज में एक स्मार्ट क्लास बनाया जायेगा, ताकि इस प्रकार की शिक्षा में बच्चों को भर पूर सहयोग मिल सके. उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट कन्या इंटर विद्यालय के सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक सुरेश प्रसाद सिंह के नेतृत्व में यह कार्य संपन्न कराया गया.
इसमें कॉलेज के प्रो नागेंद्र प्रसाद सिंह, प्रो शशि भूषण शर्मा, प्रो हरेंद्र कुमार, डॉ अशोक कुमार सिन्हा, डॉ बीके पांडेय व प्रो रामोतार शर्मा का भरपूर सहयोग रहा.
एनएसएस के तर्ज पर देंगे शिक्षा
दिल्ली में नेशनल सोशन सर्विस (एनएसएस) स्कीम के तहत आइआइटी छात्रों द्वारा ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में प्रेरणा दिया जा रहा है. जहां बच्चों को आइआइटी से संबंधित शिक्षा देकर उन्हें इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसी तरह नवादा में भी स्कीम के तेज पर वैसे इच्छुक बच्चों को समय-समय पर पढ़ायेंगे. जो इंजीनियरिंग करना चाहते हैं उनको हर संभव मदद करेंगे. रितेश कुमार ने कहा कि उसके पिता परमानंद सिंह रोह प्रखंड के पांडेय गंगौट के बारसी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग में कार्यरत हैं.
