हिसुआ : एक ओर हरेक मतदाता को वोट करने के लिए पूरा महकमा प्रेरित करता है. वोट की कीमत बतायी जाती है. लेकिन लोकतंत्र की इस महापर्व में प्रखंड की सेविका-सहायिका वोट देने से वंचित रह गयी. उन्हें सुदूर के बूथों पर वोलेंटियर के रूप में प्रतिनियुक्त कर दिया गया. वे साढ़े पांच बजे घर से निकल पड़ी और किसी तरह बूथ तक पहुंची वहां छह बजे तक उपस्थित रही.
आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाएं करती रहीं वाहनों का इंतजार
हिसुआ : एक ओर हरेक मतदाता को वोट करने के लिए पूरा महकमा प्रेरित करता है. वोट की कीमत बतायी जाती है. लेकिन लोकतंत्र की इस महापर्व में प्रखंड की सेविका-सहायिका वोट देने से वंचित रह गयी. उन्हें सुदूर के बूथों पर वोलेंटियर के रूप में प्रतिनियुक्त कर दिया गया. वे साढ़े पांच बजे घर […]

इस दरम्यान वह कहां वोट देती इसका प्रबंध अधिकारियों ने नहीं किया. सेविकाओं ने बुधवार को इसके विरोध में बीडीओ के पास जाकर गुहार भी लगायी थी लेकिन ने इस पर संज्ञान नहीं लिया गया. छठव्रति होने के बाद भी सेविकाएं बूथ पर वॉलेंटियर के रूप में काम करने पहुंची. सेविकाओं को पांच किलोमीटर से लेकर 15-17 किलोमीटर तक की दूरी के बूथों पर प्रतिनियुक्त किया गया था. छतिहर, एकनार, अरियन, सकरा, पचाढ़ा, शिवनारायण बिगहा आदि गांव के बूथों पर पहुंचने के लिए सेविकाओं को परेशानी उठानी पड़ी.
बीडीओ ने उन्हें वाहन उपलब्ध कराने की बातें कही थी लेकिन सेविकाओं को पौने आठ बजे तक प्रखंड कार्यालय गेट पर रहना पड़ा. लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था. वे जाती-आती कैसे? वोट कैसे और कहां करती इसका कोई निर्धारण नहीं किया गया था. आखिरकार सेविकाएं वोट देने से वंचित हुई.
प्रभा देवी, बबिता शर्मा, संगीता देवी, नीलम कुमारी, सुनिता कुमारी,राधा कुमारी, पूनम कुमारी, सरोज देवी, मीरा कुमारी, अंजू कुमारी, ममता कुमारी, रेखा देवी, सरिता देवी, उर्मिला देवी आदि ने बूथ पर दिनभर झेलने की परेशानी, छठव्रत छूट जाने की परेशानी और वोट नहीं देने की बातें बतायी. बिहार राज्य सेविका सहायिका संघ के संरक्षक रामयतन सिंह और जिलाध्यक्ष विजय कुमार सिंह ने भी इसका जमकर विरोध किया और यह सरकार प्रशासन की मनमानी करार दी.