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मुंबई में तिगुने दाम पर बिक रही मुजफ्फरपुर की शाही लीची, मॉरीशस से आया गुलाब की खुशबू वाली लीची का ऑर्डर

दामोदरपुर के लीची किसान विजय कुमार ने बताया कि एक पेटी में करीब पांच सौ पीस लीची होता है. समय से पार्सल मुंबई पहुंच गया तो 12-15 सौ प्रति पेटी लीची बिक जाती है.

By Prabhat Khabar Print Desk
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मुजफ्फरपुर की शाही लीची
मुजफ्फरपुर की शाही लीची
PTI

मुजफ्फरपुर. रेलवे की मदद से मुंबई के अलावा गुजरात और दिल्ली भी मुजफ्फरपुर की शाही लीची भेजी जा रही है. बताया जा रहा है कि लीची का बाजार बिहार के बाहर बेहतर है. व्यापारी और किसान को दूसरे राज्यों में अधिक दाम मिल रहे हैं. वहां ढ़ाई से तिगुना दर पर लीची बिक रही है. रविवार को मुंबई, गुजरात, दिल्ली, पंजाब हरियाणा भी लीची की खेप जा रही है. लेकिन, 80 प्रतिशत लीची मुंबई भेजी जा रही है. दामोदरपुर के लीची किसान विजय कुमार ने बताया कि एक पेटी में करीब पांच सौ पीस लीची होता है. समय से पार्सल मुंबई पहुंच गया तो 12-15 सौ प्रति पेटी लीची बिक जाती है. लेकिन, ट्रेन के लेट परिचालन से उनको नुकसान भी काफी उठाना पड़ रहा है. बताया कि बाहर में लीची किलो के भाव से भी बिकता है.

सुदूर गांव से भी पहुंच रहा खेप

जंक्शन पर आरपीएफ की निगरानी में लीची बुकिंग और लोडिंग करायी जा रही है. पहले आओ पहले बुक कराओ के तर्ज पर बुकिंग की जा रही है. रविवार को कांटी के अलावा हथौड़ी, मुशहरी, औराई के सुदूर इलाके से लीची लेकर किसान और व्यवसायी ऑटो, पिकअप, मैजिक आदि से पहुंच रहे है.

मॉरीशस से आयी गुलाब की खुशबू वाली लीची की बढ़ी मांग

मुजफ्फरपुर. शाही लीची के लिए देश-दुनिया में अपनी पहचान बना चुके जिले में अब विदेशी किस्म की लीची भी फलने लगी है. सरैया के एबीआरआइ कैंपस में मॉरीशस व नैनीताल की रोज सेंटेंड (गुलाब की खूशबू वाली) लीची में फल लगा है. इस लीची की खासियत है कि इसमें बड़े-बड़े गुच्छों में फल लगता है. यही नहीं, इसका ऊपरी भाग (छिलका) इतना मोटा होता है कि कीड़ा जल्दी नहीं लगता है. फल तोड़ने के बाद एक सप्ताह तक सामान्य तापमान में सुरक्षित रहता है.

एमबीआरआइ के संस्थापक अविनाश कुमार बताते हैं कि रोज सेंटेंड लीची का पेड़ बहुत पहले बगीचे में लगाया गया था. दो साल से फल रहा है. लेकिन इस बार दूसरे देश की तरह खूब फल लगा है. उम्मीद है कि एक पेड़ में दो क्विंटल तक फल आएगा. इसमें गुदा की मात्रा अधिक होती है. फलों के रंग में बदलाव, चिकनाई के साथ-साथ हरे से गुलाबी रंग का होने पर फल तैयार हो जाता है. फलों को गुच्छों में तोड़ा जाता है.

दिल्ली, रांची, टाटा की बसों में भरकर जा रही शाही लीची

मुजफ्फरपुर. दिल्ली जाने वाली बसों में बड़ी संख्या में यात्री अपने साथ लीची लेकर जा रहे हैं. एक बस में अमूमन 25 से 30 पेटी लीची जा रही है. इसमें कई यात्री ऐसे हैं, जो अपने खाने व आस-पड़ोस में देने के लिए ले जा रहे हैं. कई लोग चालक व कंडक्टर को प्रति पेटी 100 रुपये देकर अपने पहचान वालों को लीची भेज रहे हैं. एक दिन में बैरिया बस स्टैंड व मोतिहारी रोड होकर करीब 50 से अधिक बसें दिल्ली और हरियाणा रवाना हो रही हैं. एक दिन में बस से करीब 1500 से 1800 पेटी लीची इस माध्यम से जा रही है. सिलीगुडी, रांची, टाटा की बसों में भी लीची लोड कर लोग भेज रहे हैं.

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