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जो अपने संस्कारों से अपनी संस्कृति के अनुसार काम करता है, वह भी स्वयंसेवक, सर संघ चालक ने कहा- पूरा विश्व अपना है

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
सर संघ चालक मोहन भागवत
सर संघ चालक मोहन भागवत
फाइल

मुजफ्फरपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय संस्कृति कहती है कि पूरा विश्व अपना है. तीनों लोक अपना है. सारी दुनिया के जीवन में जो धर्म है, वह यहीं विकसित हुआ है. धर्म का मतलब मनुष्य का भौतिक जीवन ठीक रहे और समाज के साथ मानवता भी विकसित हो.

सर संघ चालक रविवार को शहर के कलमबाग रोड स्थित संस्कृति उत्थान समिति न्यास की ओर से संघ के लिए बने नये भवन का लोकार्पण कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक का अर्थ यह नहीं कि जो संघ की सदस्यता ले. ऐसा व्यक्ति जो अपने संस्कारों से अपनी संस्कृति के अनुसार काम करता है, वह भी स्वयंसेवक है. हमें इतना ध्यान रखना है कि हम आत्मग्लानि में नहीं फंसे और खुद पर अभिमान भी नहीं करें.

संघ प्रमुख ने कहा कि भारत के लोग उत्तर बिहार में रहने वाले को विपन्न समझते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है, उनमें बहुत ताकत है. संघ कार्यालय का भवन इसका उदाहरण है. यहां के लोग इससे भी बड़ा काम कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि नया भवन अच्छा बना है. यह सिर्फ भवन नहीं रहे, इसका ख्याल रखा जाना चाहिए. यहां सबको अपनापन महसूस होना चाहिए. समाज को इसकी अनुभूति हो. कार्य में विवेक, संयम, अनुशासन और सेवा की तत्परता दिखनी चाहिए. यह जिम्मेदारी सबकी है. समाज को देने के भाव से ही यहां नये भवन का निर्माण हुआ है.

Posted by Ashish Jha

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