Muzaffarpur News: जिले में परिवार नियोजन को लेकर महिलाएं तेजी से जागरूक हो रही हैं, जबकि पुरुष अब भी नसबंदी से दूरी बनाए हुए हैं. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मुजफ्फरपुर जिले की 70 प्रतिशत महिलाओं ने परिवार नियोजन के साधनों को अपनाया है. वहीं खगड़िया में 72 प्रतिशत महिलाओं ने परिवार नियोजन कराया है. इसके विपरीत गोपालगंज, सीवान और रोहतास की महिलाएं इस मामले में सबसे पीछे हैं. गोपालगंज में 23 प्रतिशत, सीवान में 24 प्रतिशत और रोहतास में केवल 29 प्रतिशत महिलाओं ने ही परिवार नियोजन कराया है.
महिलाओं की भागीदारी 7 गुना बढ़ी, पुरुष नसबंदी शून्य
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार जिले की महिलाएं परिवार नियोजन के उपायों का 7 गुणा अधिक उपयोग करने लगी हैं. जिले की 55.7 फीसद महिलाओं ने परिवार नियोजन के लिए कॉपर टी और अंतरा जैसे अस्थायी तरीकों को अपनाया है. इसके तहत 45 फीसद महिलाओं ने स्थायी साधन यानी बंध्याकरण का इस्तेमाल किया है. कुल मिलाकर 66.1 फीसद महिलाओं ने परिवार नियोजन के लिए स्थायी और अस्थायी साधनों का उपयोग किया है. बात करें पुरुषों की, तो उन्होंने नसबंदी ना के बराबर कराई है. हालिया विशेष पखवाड़े के दौरान जिले में एक भी पुरुष ने नसबंदी नहीं कराई है.
स्वास्थ्य विभाग के लक्ष्य और प्रोत्साहन राशि
स्वास्थ्य विभाग ने हर पीएचसी, एनजीओ और यूपीएचसी को परिवार नियोजन के लिए कड़ा लक्ष्य तय किया था. पखवाड़े के दौरान हर पीएचसी को 10 पुरुष नसबंदी, 60 बंध्याकरण, 100 कॉपर टी और 200 अंतरा लगाने का लक्ष्य मिला था. एनजीओ को 20 नसबंदी, 70 बंध्याकरण, 20 कॉपर टी व 50 अंतरा और यूपीएचसी को 10 नसबंदी, 20 बंध्याकरण, 30 कॉपर टी व 50 अंतरा के लिए लोगों को मोटिवेट करने की जिम्मेदारी दी गई थी. सरकार की ओर से महिला बंध्याकरण पर ₹2000 (आशा को 200 रूपये) और पुरुष नसबंदी पर 3000 रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है.
क्या बोले सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि परिवार नियोजन में महिलाएं अब आगे आने लगी हैं और ‘हम दो हमारे दो’ का नारा अपना रही हैं. पुरुषों के लिए प्रोत्साहन राशि अधिक होने के बावजूद वे नसबंदी कराने में आज भी हिचक रहे हैं. पुरुषों को लगता है कि परिवार नियोजन सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी है, जिसे बदलने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं.
मुजफ्फरपुर से कुमार दीपू की रिपोर्ट
