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मुजफ्फरपुर में सात घंटे तक दर्द से तड़पती रही प्रसूता, डॉक्टर रहे नदारद तो नर्स ने नहीं ली भर्ती

मुजफ्फरपुर में सात घंटे तक दर्द से प्रसूता तड़पती रही. नर्स जांच करने के बाद डॉक्टर को दिखाने की बात कही, लेकिन डॉक्टर के मौजूद नहीं होने पर उसे भर्ती नहीं लिया गया. डॉक्टर के आने के इंतजार करते-करते करीब शाम चार बज गया.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल
मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल
सोशल मीडिया

मुजफ्फरपुर. सदर अस्पताल के मातृ-शिशु अस्पताल में डिलेवरी के लिए आने वाली प्रसूताओं को कितनी सुविधा मिल रही है, इसका नजारा शनिवार को देखने को मिला. बनारस बैंक चौक स्थित मुहल्ला से प्रसव के लिए आयी प्रसूता सुमन कुमारी को भर्ती होने के लिए सात घंटे तक इंतजार करना पड़ा. परिजनों ने जब इसकी शिकायत सीएस कार्यालय में की, तब उसे अस्पताल में भर्ती किया गया.

प्रसूता सुमन कुमारी के परिजनों ने कहा कि पेट में दर्द होने पर सुबह नौ बजे सदर अस्पताल स्थित एमसीएच पहुंचे. नर्स ने जांच करने के बाद डॉक्टर को दिखाने की बात कही, लेकिन डॉक्टर के मौजूद नहीं होने पर उसे इंतजार करने को कहा गया. करीब दो घंटे तक इंतजार के बाद जब परिजन ने नर्स से कहा कि मरीज को भर्ती कर लें, बैठने में तकलीफ हो रही है. तो नर्स ने परिजन को कहा कि जब तक डॉक्टर भर्ती के लिए नहीं लिखेंगे, भर्ती नहीं किया जा सकता.

सीएस कार्यालय में शिकायत के बाद एमसीएच में हुई भर्ती

डॉक्टर के आने के इंतजार करें. करीब शाम चार बजे तक जब डॉक्टर नहीं आये, तो परिजन इसकी शिकायत करने सीएस कार्यालय पहुंचे. वहां से परिजन को उपाधीक्षक कार्यालय भेजा गया. इसके बाद उपाधीक्षक की पहल पर प्रसूता सुमन कुमारी को शाम 4.15 बजे एमसीएच में भर्ती किया गया. उपाधीक्षक डॉ एनके चौधरी ने कहा कि जानकारी ली जा रही है कि किस डॉक्टर की ड्यूटी लगी थी और वे क्यों नहीं आयी थीं. मौजूद कर्मी से भी जवाब तलब किया जायेगा कि प्रसूता को क्यों नहीं भर्ती किया गया.

अस्पताल में बच्चे की मौत पर हंगामा

मुजफ्फरपुर. अहियापुर थाना क्षेत्र के झपहां रोड स्थित एक अस्पताल में बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया. परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाये. कहा कि अस्पताल प्रबंधन ने अधिक राशि की मांग की, जिसे देने में परिजन ने अपनी असमर्थता जतायी. इस पर अस्पताल ने बच्चे का शव देने से इनकार कर दिया. इस पर परिजन उग्र हो गये और अस्पताल कर्मियों से उलझ गये. इससे हाथापाई तक की नौबत आ गयी. करीब आधा घंटा तक अफरातफरी के बाद अस्पताल प्रबंधन और परिजनों ने समझौता कर लिया. इसके बाद लोग शव लेकर चले गये.

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