पैदावार कम होने से लीची के कारोबार पर पड़ेगा असर
उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुरइस बार चाइना लीची की फसल काफी कम होगी. पेड़ों पर पिछले साल से 40 फीसदी कम मंजर हैं. इसके अलावा बाढ़ प्रभावित रहे क्षेत्रों में औराई और मुशहरी में चायना लीची के पेड़ों में मंजर नहीं आये हैं. किसानों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में बाढ़ नहीं भी आयी है, वहां अधिक देर तक ठंड पड़ने के कारण मंजर में काफी कमी है. मुशहरी के किसान राजीव कुमार ने बताया कि शाही लीची ठीक है, लेकिन चाइना में काफी कम मंजर होने से हमलोग निराश हैं. जिले में लीची की फसल में 65 फीसदी चाइना होती है. कारोबार का मुख्य केंद्र यही लीची रहती है, लेकिन इस बार स्थिति अच्छी नहीं है. इससे लीची का बाजार प्रभावित होगा. मीनापुर के किसान सुबोध कुमार ने बताया कि हमारे यहां चाइना लीची में 30 फीसदी की गिरावट है. कई प्रखंडों में चाइना लीची काफी कम होगी. हमलोगों ने ऐसी उम्मीद नहीं की थी, लेकिन इस बार की स्थिति अच्छी नहीं है.
12 हजार हेक्टेयर में होती है लीची की फसलजिले में लीची की फसल 12 हजार हेक्टेयर में होती है. करीब एक लाख टन लीची का उत्पादन होता है. जिसमें चाइना लीची की मात्रा सबसे अधिक होती है, लेकिन इस बार चाइना लीची का फलन कम हो रहा है. किसानों का कहना है कि पिछले साल शाही के अलावा चाइना लीची भी अमेरिका, इंग्लैंड और सऊदी अरब के देशों में भेजी गयी थी. इस बार एक्सपोर्ट कम हो जायेगा. इसका घाटा हमलोगों को उठाना पड़ेगा. जितने मंजर अभी चायना में दिख रहे हैं, वह भी बचा रहेगा, यह कहना भी अभी मुश्किल है. कांटी के किसान बबलू शाही ने बताया कि दस दिनों के अंदर चायना फसल की वास्तविक स्थिति का पता लगेगा.
वर्जनइस बार सभी प्रखंड के किसानों का कहना है कि चाइना लीची की फसल काफी कमजोर है. इससे किसानों को घाटा उठाना पड़ेगा. जिले में चाइना लीची की फसल अच्छी नहीं होने से कारोबार पर असर पड़ेगा. बाजार से लीची भी समय से पहले समाप्त हो जायेगी
– बच्चा प्रसाद सिंह, अध्यक्ष, बिहार लीची उत्पादक संघडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
