वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर जिले के निजी अस्पतालों में डेंगू के पॉजिटिव मरीजों की पहचान होने लगी है, और उनका इलाज भी शुरू हो गया है. लेकिन, सरकारी स्वास्थ्य विभाग अभी तक एक भी डेंगू मरीज की पुष्टि नहीं कर पाया है, जिससे स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं. जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार के अनुसार, सरकारी महकमा निजी अस्पतालों की जांच रिपोर्ट को डेंगू की पुष्टि नहीं मानता है. उनका कहना है कि अगर किसी निजी अस्पताल में डेंगू के मरीज की पुष्टि होती है, तो उन्हें इसकी पूरी जानकारी देनी होगी, ताकि एसकेएमसीएच के लैब में उसकी क्रॉस-चेकिंग कराई जा सके. केवल सरकारी लैब की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही किसी मरीज को डेंगू का माना जाएगा. निजी अस्पताल छिपा रहे जानकारी?. डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि निजी अस्पतालों को डेंगू से जुड़ी हर जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने कोई रिपोर्ट नहीं दी है. उन्होंने निजी अस्पतालों से अपील की है कि वे पॉजिटिव मरीजों की जानकारी तुरंत विभाग को दें और सरकारी पैथोलॉजी से उनकी जांच भी कराएं. वहीं, दूसरी ओर, यह भी आरोप लग रहे हैं कि निजी अस्पताल डेंगू से जुड़ी जानकारी को जानबूझकर छिपा रहे हैं. इसका एक बड़ा कारण आर्थिक लाभ हो सकता है. सरकारी अस्पतालों में डेंगू की जांच से लेकर इलाज तक सब कुछ मुफ्त है, जबकि निजी अस्पताल डेंगू के एक मरीज को कम से कम एक सप्ताह के लिए भर्ती करते हैं, जिससे उनका 30 हजार रुपये से अधिक का बिल बन जाता है. स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट देने पर उनकी मोटी कमाई पर सवाल उठ सकते हैं, इसीलिए वे जानकारी साझा करने से बच रहे हैं. फिलहाल, जिले में डेंगू की स्थिति पर विरोधाभास बना हुआ है. सरकारी महकमा जहां एक भी मरीज की पुष्टि नहीं कर रहा, वहीं निजी अस्पतालों में मरीज सामने आने लगे हैं. इस स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को निजी अस्पतालों के साथ समन्वय स्थापित करने की जरूरत है, ताकि डेंगू के वास्तविक आंकड़े सामने आ सकें और समय रहते बीमारी को फैलने से रोका जा सके.
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