मुशहरी में लीची के निर्यात क्षमता संवर्धन एवं पैकेजिंग पर विशेष सत्र का आयोजन
मुशहरी. भाकृअनुप-राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र में लीची के निर्यात क्षमता संवर्धन एवं पैकेजिंग पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, वैशाली, बेगूसराय, और भागलपुर से आए किसानों, व्यापारियों, और निर्यातकों ने भाग लिया. कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्र के निदेशक डॉ. बिकाश दास और अन्य उपस्थित अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर किया. उद्घाटन भाषण में डॉ. दास ने लीची की पैकेजिंग और उसकी लाइफ बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने बताया कि उचित तापमान नियंत्रण और मॉडिफाइड एटमॉस्फियर पैकेजिंग के उपयोग से लीची की ताजगी अधिक समय तक बनाए रखी जा सकती है.
डॉ. सी.बी. सिंह, उपमहाप्रबंधक एवं क्षेत्रीय प्रमुख, एपेडा ने किसानों को निर्यात की संभावनाओं के बारे में जागरूक किया. डॉ. एन.सी. साह, पूर्व निदेशक, आईआईपी, नई दिल्ली ने एक्टिव माप पैकेजिंग पर अपने शोध को साझा करते हुए बताया कि पैकेजिंग फिल्म में लीची को 10 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है.इस सत्र में डॉ. तारिक असलम, सहायक निदेशक, उद्यान, मुजफ्फरपुर और डॉ. तृप्ति गुप्ता, सहायक निदेशक, उद्यान, पटना ने लीची की उत्पादन तकनीकों और विपणन रणनीतियों पर चर्चा की. डॉ. सुमन प्रभा, डीडीएम, नाबार्ड ने किसानों को वित्तीय सहायता योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की.
डॉ. सुधीर कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर ने लीची के निर्यात में आने वाली चुनौतियों पर अपने विचार रखे. लीची ग्रोवर एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.पी. सिंह और सचिव केशव नंदन ने लीची के मूल्य संवर्धन और बाजार विस्तार के उपाय सुझाए.इस अवसर पर बीहपुर, भागलपुर से प्रगतिशील किसान श. चंदन कुमार, पटियासा से चंद्रेश्वर सिंह, छतवारा, वैशाली से ललितेश्वर प्रसाद सिंह, तथा केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विनोद कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अभय कुमार, वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार, ई. अंकित कुमार, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. इपसिता सामल, और वरिष्ठ तकनीकी सहायक उपज्ञा साह परियोजना सहायक श्याम पंडित एवं अखंड प्रताप पांडेय उपस्थित रहे. धन्यवाद ज्ञापन ई. अंकित कुमार ने दिया.
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