Muzaffarpur cyber fraud: मुजफ्फरपुर के कच्ची पक्की ओपी क्षेत्र स्थित दिघरा रामपुर साह गांव में साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. साइबर अपराधियों ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए खुद को दिल्ली हाईकोर्ट का वकील बताकर पीड़ित को गंभीर पुलिस कार्रवाई की धमकी दी. इसके अगले ही दिन पीड़ित के बैंक खाते से 98,999 रुपये दूसरे खाते में ऑनलाइन ठगी की पूरी घटना को अंजाम दिया गया. इस मामले में पीड़ित की शिकायत पर सदर थाने में अज्ञात अपराधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है.
Delhi High Court lawyer scam: व्हाट्सएप कॉल पर खुद को बताया दिल्ली हाईकोर्ट का वकील
पीड़ित राजेश कुमार ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि 11 अगस्त को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई थी. कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली हाईकोर्ट का वकील बताते हुए विकास नामक व्यक्ति के बारे में जानकारी मांगी. जब राजेश ने ऐसे किसी व्यक्ति के होने से साफ इनकार किया, तो आरोपी भड़क गया और महज दो घंटे के भीतर गंभीर पुलिस कार्रवाई करवाने की धमकी देकर उन्हें मानसिक रूप से डरा दिया.
cyber crime: खाते से 98,999 रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर
धमकी मिलने के ठीक अगले दिन यानी 12 अगस्त को दोपहर 12:48 बजे डिजिटल फ्रॉड का यह खेल शुरू हुआ. पीड़ित के एसबीआई खाते से 98,999 रुपये उनके ही सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खाते में ट्रांसफर हो गए. इसके महज पांच मिनट बाद ही पूरी की पूरी रकम ‘रामवीर’ नामक यूपीआई आईडी पर भेज दी गई. जब बैंक से पैसे कटने का मैसेज मोबाइल पर आया, तब जाकर राजेश कुमार को अपने साथ हुई साइबर ठगी की जानकारी मिली.
1930 पर शिकायत के बाद सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज
घटना के तुरंत बाद सतर्कता दिखाते हुए पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद 14 अगस्त को कच्ची पक्की ओपी में लिखित आवेदन दिया गया. मामले के अग्रसारित होने के बाद 16 अगस्त को सदर थाने में बीएनएस की धारा 303(2), 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66(C), 66(D) के तहत औपचारिक एफआईआर दर्ज की गई है.
मोबाइल नंबर और यूपीआई आईडी खंगाल रही पुलिस
इस हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड मामले की जांच की जिम्मेदारी एसआई देवानंद कुमार को सौंपी गई है. पुलिस उस अज्ञात मोबाइल नंबर का सुराग ढूंढने में जुटी है जिससे व्हाट्सएप कॉल आई थी. इसके साथ ही जिस ‘रामवीर’ नामक यूपीआई खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर की गई है, उसकी बैंक डिटेल्स और आईपी एड्रेस की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि अपराधियों तक पहुंचा जा सके.
