बीआरएबीयू का अजीब कारनामा: पढ़ी लाइब्रेरी साइंस और डिग्री मिली 'फिशरीज' की, छात्र परेशान

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय का एक चौंकाने वाला कारनामा सामने आया है, जहां छात्रों को गलत डिग्री बांटी जा रही हैं. लाइब्रेरी साइंस के छात्रों को फिशरीज की डिग्री मिलने से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

BRABU Degree Scandal: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की प्रशासनिक कार्यशैली एक बार फिर बड़े सवालों के घेरे में है. विश्वविद्यालय के परीक्षा और डिग्री विभाग का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जो पूरी शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही की पोल खोलता है. जिन छात्र-छात्राओं ने इंस्टीट्यूट ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस (बीलिस) से पढ़ाई की और परीक्षा उत्तीर्ण की, उन्हें विश्वविद्यालय ने 'बैचलर ऑफ इंडस्ट्रियल फिश एंड फिशरीज' की डिग्री थमा दी है. लापरवाही का आलम सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि बीसीए (बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन) की पढ़ाई पूरी करने वाले एक छात्र को बीबीए (बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) का प्रमाणपत्र दे दिया गया है.

आठ महीने के लंबे इंतजार के बाद मिली त्रुटिपूर्ण डिग्री

पीड़ित छात्र ने आरोप लगाया कि निर्धारित शुल्क देने और ऑनलाइन आवेदन करने के आठ महीने के लंबे इंतजार के बाद उसे डिग्री दी गई. जब उसे डिग्री मिली, तो उसने बिना जांच किए ही इसे दिल्ली के एक प्रतिष्ठित संस्थान में नौकरी/नामांकन के लिए प्रस्तुत कर दिया. वहां जांच के दौरान उसे न सिर्फ डांट खानी पड़ी, बल्कि उसकी मूल डिग्री को भी संदेह के घेरे में डाल दिया गया. इसके बाद छात्र मानसिक रूप से परेशान होकर वापस विश्वविद्यालय के चक्कर काट रहा है. मूल डिग्री पर लिखे शब्द खुद लापरवाही की गवाही दे रहे हैं, जहां कॉलेज का नाम लाइब्रेरी साइंस है और उपाधि फिशरीज की दर्ज है.

विवरण देने के बाद भी बड़ी चूक, सत्यापन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

छात्रों का कहना है कि उन्होंने अपने आवेदन फॉर्म में विषय से लेकर कॉलेज तक का बिल्कुल सही विवरण भरा था, इसके बावजूद छपाई में इतनी बड़ी तकनीकी और मानवीय भूल कैसे हो गई, यह समझ से परे है. प्रशासनिक महकमे की इस भारी चूक ने पूरे परीक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, डेटा प्रविष्टि (डाटा एंट्री) और डिग्री वितरण से पहले होने वाली सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ से युवाओं में भारी आक्रोश व्याप्त है.

मानवीय भूल, दो दिनों में होगा सुधार: परीक्षा नियंत्रक

इस पूरे मामले पर बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. राम कुमार ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्रों की डिग्री तैयार की जाती है, जिसमें मैनुअल डेटा एंट्री होती है. मानवीय भूल के कारण 5 से 10 प्रतिशत डिग्री में स्पेलिंग या कोर्स के नाम गलत हो जाते हैं. अमूमन टीआर से सत्यापन के दौरान इसे पकड़ लिया जाता है. यदि किसी छात्र को ऐसी गलत डिग्री मिल गई है, तो वे परीक्षा विभाग के डिग्री सेक्शन में इसे जमा करा सकते हैं. अगले दो कार्य दिवस के भीतर इसे पूरी तरह सुधार कर दूसरी नई डिग्री छात्र को निर्गत कर दी जाएगी.

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लेखक के बारे में

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