ऑनलाइन परीक्षा केंद्र दिलाने के नाम पर B.Ed कॉलेज संचालक से 5.44 लाख की ठगी

मुजफ्फरपुर में एक B.Ed कॉलेज संचालक को ऑनलाइन परीक्षा केंद्र दिलाने का लालच देकर साइबर अपराधियों ने 5.44 लाख रुपये की ठगी कर ली. खुद को आईटी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर ठगों ने पूरी प्रक्रिया को विश्वसनीय बनाया.

मुजफ्फरपुर से चंदन सिंह की रिपोर्ट

Muzaffarpur Cyber Fraud: ऑनलाइन परीक्षा केंद्र आवंटित कराने का झांसा देकर साइबर अपराधियों ने एक B.Ed कॉलेज संचालक से 5.44 लाख रुपये की ठगी कर ली. ठगों ने खुद को एक प्रतिष्ठित आईटी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर पूरी प्रक्रिया को असली जैसा दिखाया. मामले में पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.

ट्रूकॉलर पर कंपनी का नाम देखकर हुआ भरोसा

ब्रह्मपुरा निवासी गौतम कुमार शेखावत ने पुलिस को बताया कि उनके मोबाइल पर एक महिला का फोन आया. उसने खुद को एक नामी आईटी कंपनी का प्रतिनिधि बताया. ट्रूकॉलर पर भी उसी कंपनी का नाम दिखने के कारण उन्हें किसी तरह का संदेह नहीं हुआ.

महिला ने कॉलेज को ऑनलाइन परीक्षा केंद्र बनाने का प्रस्ताव दिया और ई-मेल के जरिए आवेदन फॉर्म भेज दिया.

फिजिकल वेरिफिकेशन और एग्रीमेंट से बढ़ा विश्वास

पीड़ित के अनुसार, 16 फरवरी 2026 को एक व्यक्ति उनके कॉलेज पहुंचा और फिजिकल वेरिफिकेशन किया. इसके बाद ई-मेल के माध्यम से नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट (NDA) और एलोकेशन कन्फर्मेशन लेटर भी भेजा गया.

इन सभी औपचारिकताओं के कारण उन्हें लगा कि पूरी प्रक्रिया वास्तविक है.

दो खातों में ट्रांसफर करा लिए 5.44 लाख रुपये

पांच मार्च 2026 को आरोपियों ने कंप्यूटर उपकरणों के नाम पर 7.15 लाख रुपये का कोटेशन भेजा और कहा कि आधी राशि कंपनी देगी, जबकि शेष कॉलेज को जमा करनी होगी.

इसके बाद पीड़ित ने 6 मार्च को अपने कॉलेज के एसबीआई खाते से 3,39,788 रुपये एनईएफटी के माध्यम से केके इंटरप्राइज के यूको बैंक खाते में भेज दिए.

कुछ दिन बाद 25 केवीए जनरेटर के नाम पर नया कोटेशन भेजा गया और 12 मार्च को 2,05,000 रुपये सिंह इंटरप्राइज के इंडियन ओवरसीज बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिए गए.

इस तरह कुल 5.44 लाख रुपये ठग लिए गए.

चुनाव का बहाना बनाकर टालते रहे

राशि मिलने के बाद आरोपियों ने अप्रैल में उपकरण भेजने का आश्वासन दिया. जब देरी हुई तो व्हाट्सएप कॉल पर पश्चिम बंगाल चुनाव और नेटवर्क की समस्या का हवाला देकर समय मांगते रहे.

पीड़ित के अनुसार 15 मई के बाद दोनों मोबाइल नंबर बंद हो गए. काफी प्रयास के बाद संपर्क नहीं होने पर उन्हें ठगी का एहसास हुआ.

साइबर थाना में दर्ज हुई एफआईआर

पीड़ित ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई है. साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है.

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Published by: Aaruni Thakur

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