मुजफ्फरपुर: डाक विभाग ने ग्राहकों को आधुनिक सुविधा के लिये सभी 55 उप डाकघरों को हाइटेक बनाने के लिए प्रोजेक्ट ऐरो योजना की शुरुआत की थी. इस योजना के तहत लगभग 75 लाख रुपये खर्च किये गये.
मगर यह योजना सफल साबित नहीं हुई. आज आलम यह है कि योजना के तहत लाखों खर्च के बाद भी इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है. आज भी उप डाकघरों में सुविधाओं का रोना रोया जा रहा है. वर्ष 2008 में सूबे के सभी प्रधान डाकघरों व उप डाकघरों में इस योजना की शुरुआत की गयी थी. इसके तहत प्रखंडों के उप डाकघरों को पुराने स्वरूप में बदलाव किया गया.
ग्राहकों को बेहतर सुविधा प्रदान करना था उद्देश्य. उप डाकघरों में प्रोजेक्ट ऐरो योजना के तहत नये काउंटर बनाये गये. कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया. डाकिया को यूनिफॉर्म, डिलेवरी बैग, कंप्यूटर लगाये गये, मिट्टी तेल वाले जेनरेटर लगाये गये. कुरसी टेबल दिये गये. यह सब महज छह माह ही रहा. अब डाकघरों में सिवाय कुरसी टेबल के कुछ भी दिखायी नहीं दे रहा है. डाकघरों में सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है. ग्राहकों को सुविधा के जगह परेशानी उठानी पड़ रही है.
इन सुविधाओं से सुसज्जित किया गया था. डाकिया को वरदी व बैग, काउंटर बने, कंप्यूटर, यूपीएस, जेनेरेटर, कुरसी टेबल, इंटरनेट की सुविधा, पासबुक अपडेट
करने वाली मशीन, डाक टिकट संकलन, डाकघर के मेन गेट पर साइन बोर्ड आदि सुविधा दी गयी थी.
