छेड़खानी के आरोप में पिट गया टीकाधारी सिपाही

मुजफ्फरपुरः चिलचिलाती धूप के बीच दोपहर बाद एक बजे जैसे ही ये टीकाधारी सिपाही जी सदसपार अस्पताल मोड़ पर टेंपो से उतरे, इनका खराब समय शुरू हो गया. इनकी करतूत ने इन्हें वो दिन दिखाया, जिसकी इन्होंने कल्पना तक नहीं की होगी. दोष इनका नहीं, दोष दो पैग का था, जो इन्होंने वर्दी का रोब […]

मुजफ्फरपुरः चिलचिलाती धूप के बीच दोपहर बाद एक बजे जैसे ही ये टीकाधारी सिपाही जी सदसपार अस्पताल मोड़ पर टेंपो से उतरे, इनका खराब समय शुरू हो गया. इनकी करतूत ने इन्हें वो दिन दिखाया, जिसकी इन्होंने कल्पना तक नहीं की होगी. दोष इनका नहीं, दोष दो पैग का था, जो इन्होंने वर्दी का रोब झाड़ने के लिए लगाया था. दरअसल, सिपाही जी के बारे में पता चला, ये जेल में तैनात हैं और टेंपो पर सवार होकर शहर आये थे. कहां से कहां जा रहे थे. इसके बारे में भी पता नहीं चल सका, लेकिन जैसे ही सदर अस्पताल के पास टेंपो से उतरे, उसमें सवार तीन-चार लड़कियां शोर मचाने लगीं. वो सभी सिपाही जी पर छेड़खानी का आरोप लगा रही थीं.

इसके बारे में आसपास के लोगों को पता चला, तो वहां भीड़ इकट्ठा हो गयी. मजरा समझ में आते ही लोगों ने सिपाही जी को सबक सिखाने की ठान ली. इस दौरान सिपाही जी टेंपो चालक से किराये को लेकर बहस कर रहे थे. दरअसल, सिपाही जी वर्दी का रौब दिखा कर किराया भी नहीं देना चाह रहे थे, लेकिन वक्त को तो कुछ और ही मंजूर था. लोगों ने सिपाही जी को पकड़ लिया. लोगों को आक्रामक देख वो भागने की जुगत लगाने लगे, लेकिन तभी किसी ने बाल पकड़ा, किसी ने हाथ और सिपाही जी को उनके कर्मो की सजा भीड़ देने लगी. एक-दो करके थप्पड़, घूसे..सिपाही जी पर बरसने लगे. खुद को पिटने से बचाने के लिए सिपाही जी थोड़ी दूर तक भागे, लेकिन भीड़ कहां मानने वाली थी. उसने सिपाही जी के कर्मो की सजा उन्हें देने की ठान रखी थी. सो थप्पड़ व घूसे उन पर लगातार बरस रहे थे. इस दौरान आसपास तैनात पुलिसवाले भी उन्हें बचाने के लिए नहीं आये. कुछ लोगों सिपाही जी से उनका नाम पूछा, लेकिन वह चुप्पी साध गये. भाग कर मोतीझील फ्लाइओवर की ओर जा रहे थे, वहां तक भीड़ ने उनकी जम कर सेवा की, लेकिन इसके बाद भीड़ वापस हो गयी. जैसे ही सिपाही जी अकेले हुये. पास में लोहे का ग्रिल पकड़ कर फफक-फफक कर रोने लगे. सिपाही जी बार-बार यही कह रहे थे, हमने ऐसी कोई भी हरकत नहीं की है. हमें बेवजह बदनाम किया गया है.

इतना सब होने के बाद भी पास में नगर थाना व डीएसपी का ऑफिस है, लेकिन कोई भी पुलिस वाला मौके पर नहीं पहुंचा. यही नहीं, जब घटना की सूचना मिली, तो पुलिस वाले कहने लगे, किसी ने शिकायत नहीं की है. ऐसे में हम क्या कर सकते हैं. हालांकि शाम को सूचना मिली, वरीय अधिकारी सक्रिय हुये हैं, उन्होंने आरोपित सिपाही का नाम पता लगाने का निर्देश दिया है, लेकिन पुलिस वाले देर रात तक सिपाही के बारे में जानकारी नहीं जुटा सके थे. पुलिस के इस अंजाद से उसकी कार्यशैली का पता चलता है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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