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ताकत का भरोसा व बेहतरी की उम्मीद के साथ मुजफ्फरपुर में प्रभात खबर के 11 साल का सफर पूरा

देश का 40 प्रतिशत लीची उत्पादन बिहार में होता है. लीची की खेती 32 हजार हेक्टेयर में होती है. हर साल एक हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
आज मुजफ्फरपुर से प्रभात खबर ने पूरा किया अपनी स्थापना के 11 साल
आज मुजफ्फरपुर से प्रभात खबर ने पूरा किया अपनी स्थापना के 11 साल
प्रभात खबर

आशुतोष चतुर्वेदी, प्रधान संपादक

Muzaffarpur news: लीची के लिए देश-दुनिया में मशहूर मुजफ्फरपुर से प्रभात खबर ने आज अपनी स्थापना के 11 साल पूरे कर लिये. अपनी यात्रा के दौरान प्रभात खबर ने हमेशा जनसरोकार से जुड़ी खबरों को तवज्जो दी. खबरों की विश्वसनीयता ही हमारी पूंजी रही है. स्थापना के 12वें वर्ष में प्रवेश के मौके पर प्रभात खबर ने उन तथ्यों को रेखांकित करने की कोशिश की है, जो उत्तर बिहार की ताकत हैं और जिनके बलबूते जिंदगी को खुशहाल बनाया जा सकता है.

जन आकांक्षाओं को स्वर देने की कोशिश

पाठकों के स्नेह और भरोसे के बल पर प्रभात खबर का मुजफ्फरपुर संस्करण आज अपना 11वां स्थापना दिवस मना रहा है. अपनी इस यात्रा के दौरान प्रभात खबर उत्तर बिहार के लोगों की पीड़ा और अपेक्षाओं को स्वर देने का मंच बना. प्रभात खबर के मुजफ्फरपुर संस्करण से उत्तर बिहार के आठ जिले - मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, समस्तीपुर, पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण जुड़े हैं. इन सभी आठ जिलों के हर तबके के पाठकों ने हम पर भरोसा किया. प्रभात खबर ने हमेशा विकासोन्मुख पत्रकारिता को केंद्र में रखा. हमने समय-समाज के जरूरी सवालों को हमेशा उठाया. कंटेंट के स्तर पर एक नयी किस्म की पत्रकारिता का प्रयास किया. अनेक ऐसे विषय-मुद्दे रहे, जिसे हमने पत्रकारीय नजर से देखा.

बाढ़ग्रस्त इलाकों के लोगों की पीड़ा हो अथवा बुनियादी जरूरतों के संकट हों या शासन के निराशाजनक पहलू, प्रभात खबर हमेशा जनपक्षधरता के साथ खड़ा रहा. प्रभात खबर कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सेतु बना, ताकि उर्वर भूमि का फायदा इस राज्य को मिल सके. सोशल मीडिया के बढ़ते पैठ के इस दौर में हमने सनसनी फैलाने वाली खबरों की प्रतिस्पर्धा में कूदने की बजाए समाज में सकारात्मक पहल को सामने लाने की कोशिश की. शिक्षा, स्वास्थ्य, बेहतर नागरिक सुविधाएं जैसे मुद्दे प्रभात खबर की प्राथमिकताओं में हैं.

दरअसल, दशकों से बाढ़ की विभीषिका और आधारभूत संरचना की कमी झेल रहा उत्तर बिहार अब बदलाव की राह पर है, जिसे समझने-समझाने की जरूरत है. दरभंगा से हवाई सेवा शुरू हो जाने के बाद यह इलाका देश के प्रमुख शहरों से सीधे जुड़ गया है. दरभंगा से प्रतिदिन मुंबई, नयी दिल्ली, बेंगलुरु, अहमदाबाद, हैदराबाद और कोलकाता के लिए उड़ान सेवा है. दरभंगा एयरपोर्ट से दस माह में करीब चार लाख यात्रियों की आवाजाही होना अपने आप में मायने रखता है. दरभंगा में एम्स का निर्माण होना है.

समस्तीपुर के सरायरंजन में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को मंजूरी मिल चुकी है. मुजफ्फरपुर में टाटा मेमोरियल सेंटर के सहयोग से श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में कैंसर का बड़ा अस्पताल बन रहा है. सड़क और रेल कनेक्टिविटी की बात करें, तो औरंगाबाद से दरभंगा तक फोर लेन सड़क और पटना से अरेराज होते बेतिया तक बनने वाला नया फोरलेन बड़े बदलाव का वाहक बनेगा. इसके अलावा मोतीपुर एक नया औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है. यहां 168 एकड़ में मेगा फूड सेंटर की स्थापना होने वाली है. इथेनॉल के कई प्लांट स्थापित होने वाले हैं.

हमारा मानना है कि इन 11 वर्षों की यात्रा में पाठकों ने हमारा भरपूर साथ दिया और हमें आगे बढ़ने का साहस दिया है. इस मौके पर हम उनका दिल से आभार व्यक्त करते हैं. हर सुबह पाठकों तक अखबार पहुंचाने वाले वितरक बंधुओं के प्रति भी हम सम्मान जाहिर करते हैं. यात्रा के इस पड़ाव तक प्रभात खबर के विभिन्न विभागों के सहयोगियों के बगैर पहुंच पाना मुमकिन नहीं था. उन सबके प्रति भी आभार और शुभकामनाएं.

Posted by: Radheshyam Kushwaha

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