उर्दू विभाग के साहित्यिक व सांस्कृतिक प्रोग्राम में छात्राओं ने दिखाई प्रतिभा

उर्दू विभाग के साहित्यिक व सांस्कृतिक प्रोग्राम में छात्राओं ने दिखाई प्रतिभा

बीआरएम कालेज के उर्दू विभाग में ”एहसास” के थीम के तहत संगोष्ठी आयोजित मुंगेर. बीआरएम कालेज के उर्दू विभाग में ”एहसास” के थीम के अंतर्गत उर्दू का शायराना मिजाज पर संगोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें वक्ताओं ने उर्दू की परम्परा व उस के शाब्दिक अर्थों की व्याख्या पर विवेचनात्मक प्रकाश डालते हुए आज के समय में इसकी उपयोगिता को सामने रखा. मुख्य अतिथि सदर अस्पताल के डाॅ गजाली व विशिष्ट अतिथि के रूप में मुंगेर विश्वविद्यालय उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो शाहिद रजमी और झाझा कालेज उर्दू विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शाहिद अंसारी मौजूद थे. डॉ गजाली ने उर्दू की स्थिति पर अपने व्याख्यान के दौरान कहा कि बीआरएम की छात्राओ ने जिस तरह अपने हुनर को प्रदर्शित किया, उससे मैं बहुत प्रभावित हुआ और मैं जैन शम्सी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने ने उर्दू की छात्राओ में पढ़ने और आगे बढ़ने का हौसला पैदा किया. प्रो बंदना कुमारी ने कहा कि उर्दू विभाग कालेज का समृद्ध विभाग हैं. ज़ैन शम्सी यहां मात्र तीन दिन ही रह पाते हैं. बाक़ी तीन दिन वे विश्विद्यालय के पीजी विभाग में सेवा देते हैं. बावजूद उन्होंने विभाग की छात्राओं को भविष्य की ओर बढ़ने को प्रेरित किया. प्रो राम रेखा ने कहा कि छात्राओं और शिक्षकों के समन्वय उर्दू विभाग की पहचान के तौर पर देखा जाने लगा है. विभाग की तरफ से बच्चों को बेहतरीन छात्रा, अनुशासित छात्रा, समाज सेवा एवं सांस्कृतिक,सब से ज़्यादा क्लास में उपस्थित रहने वाली छात्रा जैसे क्षेत्रों में अवार्ड, कप और सर्टिफिकेट वितरण करके उर्दू विभाग ने पठन पाठन को नया आयाम दिया है. तारिक अनवर ने कहा, मै उर्दू विभाग की छात्राओं का ज्ञान व उनकी मंत्र मुग्ध प्रतिभा देख कर आश्चर्यचकित हूं.मंच का संचालन कर रहे उर्दू विभागाध्यक्ष डाॅ जैन शम्सी ने कहा कि छात्राओं की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए मुझे जितनी भी मेहनत करनी हो, करता ही रहुंगा. वक्ताओं में रेवेन्यू आफिसर नादिर अयुबी, इतिहास विभाग के प्रोफेसर रोहित कुमार, दर्शन शास्त्र की प्रोफेसर बंदना कुमारी ने अपने सुविचारो से बड़ी संख्या में उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित किया. कालेज की प्रिंसिपल डॉ निर्मला कुमारी ने उर्दू विभाग के द्वारा लगातार आयोजित किए जाने वाले सेमीनार, गोष्ठी, कविता पाठ और इनामी मुकाबले की सराहना करते हुए कहा कि उर्दू की छात्राओ में शिक्षा के साथ साथ समाजिक जागरूकता का विकास हुआ है.

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Author: RANA GAURI SHAN

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