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कोरोनाकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुंगेर के एके-47 बरामदगी मामले में थम गयी जांच, जमीन और कुआं के अंदर से मिला था हथियार

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
सांकेतिक फोटो
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social media

कोरोना संक्रमण के कारण दो वर्षों से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुंगेर में बरामद एके-47 हथियार मामले का अनुसंधान थम सा गया है, जबकि 2018-19 में मुंगेर एके-47 हथियार के मामलों को लेकर देश-विदेश की सुर्खियों में बना रहा. क्योंकि मुंगेर के कुआं, जमीन के अंदर से प्रतिबंधित 22 एके-47 हथियार मुंगेर पुलिस ने बरामद किये थे. जब मामला देश की सुरक्षा एजेंसी एवं आयुध कारखाना जबलपुर मध्यप्रदेश से जुड़ा तो केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय तक एक्टिव हो गयी.

इस मामले में कुल आठ प्राथमिकी मुंगेर के विभिन्न थानों में दर्ज हुई है. इसमें एक मामले की जांच एनआइए को सौंपी गयी, लेकिन जिन कांडों का अनुसंधान मुंगेर पुलिस के जिम्मे है. उसका न सिर्फ अनुसंधान थम गया है, बल्कि गिरफ्तारियों का दौर भी पूरी तरह से रुका हुआ है. जबकि बरामदगी के समय जांच में तत्कालीन डीआइजी व एसपी ने कई लोगों की इस कांड में संलिप्तता पर मुहर लगायी थी.

29 अगस्त 2018 को जमालपुर के जुबली बेल चौक पर मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मिर्जापुर बरदह गांव निवासी मो इमरान को पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था. उसके पास से तीन एके-47 हथियार पुलिस ने जब्त किया था. तत्कालीन एसपी बाबू राम ने इसे गंभीरता से लिया और एके-47 के कनेक्शन को खंगालना शुरू किया. उनका प्रयास रंग लाया. कभी जमीन के अंदर से एके-47 हथियार निकाला गया तो कभी कुंआ से एके-47 निकाला. यहां तक की नदी-नाला में गोताखोरों को उतार दिया गया था. जेसीबी मशीन लगवा कर बरदह में खेतों की जुताई कर दी गयी थी.

मुंगेर पुलिस ने बिहार, झारखंड में लगातार छापेमारी की. इसी का परिणाम था कि 22 एके-47 हथियार को मुंगेर पुलिस ने जब्त किया. इतना ही नहीं भारी मात्रा में एके-47 हथियार के पार्ट्स एवं सैकड़ों की संख्या में कारतूस बरामद किये गये.

इस मामले में मुफस्सिल थाना में जहां पांच कांड दर्ज हैं. वहीं जमालपुर व कोतवाली थाना में एक-एक मामला दर्ज है. जबकि मुफस्सिल थाना कांड संख्या 323/18 को एनआइए के हवाले कर दिया गया. सात मामलों में 55 लोगों को नामजद किया गया है. इसमें कई ऐसे भी हैं जिनका नाम बाद में कांड में जोड़ा गया है. यह पुलिस की उदासीनता का ही परिणाम रहा कि आधे दर्जन से अधिक अभियुक्तों ने बेल भी ले लिया है. किसी ने अग्रिम जमानत लिया तो किसी ने जेल में रहते हुए जमानत ली.

जब से कोरोना महामारी की स्थिति बनी और लोग बड़ी संख्या में इस संक्रमण का शिकार होने लगे तो मुंगेर पुलिस पर भी इसका असर पड़ा. कोरोना कहर का असर यह रहा है कि न तो अनुसंधान गति पकड़ पा रही है और न ही इन मामलों में फरार चल रहे नामजद व अप्राथमिक अभियुक्तों की गिरफ्तारी हो रही है.

मुंगेर पुलिस ने 22 एके-47 हथियार बरामद किये . साथ ही लगभग तीन दर्जन आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था. पकड़े गये हथियार तस्करों ने यह स्वीकार किया था कि वे लोग लगभग 70 एके-47 राइफल को मुंगेर में आयुध कारखाना जबलपुर मध्यप्रदेश से चोरी कर लाया, लेकिन पुलिस की कार्रवाई में मात्र 22 एके-47 राइफल ही बरामद हो पायी.

आज भी लगभग 50 एके-47 राइफल की बरामदगी नहीं हो पायी. बताया जा रहा है कि एके-47 मामले में आयुध कारखाना जबलपुर में कार्यरत मध्यप्रदेश निवासी पुरुषोत्तम लाल रजक, सीनियर स्टोर कीपर सुरेश ठाकुर, सेना का जवान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मिर्जापुर बरदह निवासी मो नियाजुर रहमान उर्फ नियाजुल रहमान उर्फ मो गुलो उर्फ गुलशाद, उसका भाई मो शमशेर उर्फ वीरो ने रिमांड के दौरान पुलिस को बताया कि वर्ष 2012 से लेकर वर्ष 2018 के बीच लगभग 65 से 70 एके-47 हथियार मुंगेर लाया. पुरुषोत्तम लाल ही हमेशा अपनी पत्नी के साथ जबलपुर से ट्रेन द्वारा हथियार पहुंचाता था.

पुलिस ने 22 एके-47 हथियार तो बरामद कर लिया, लेकिन अब भी लगभग 50 एके-47 हथियार की बरामदगी होनी बांकी है. 29 अगस्त 2018 को पहली बार व 26 दिसंबर 2018 को आखिरी बार एके-47 बरामद हुआ था. लेकिन समय के साथ एके-47 में जांच की रफ्तार धीमी होती चली गयी. तत्कालीन एसपी बाबू राम के तबादले के बाद एके-47 मामले में छानबीन की रफ्तार काफी धीमी हो गयी. एसपी गौरव मंगला के समय में मात्र एक एके-47 हथियार बरामद हो पाया था.

POSTED BY: Thakur Shaktilochan

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