भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को सात दिन-रात अंगुली पर धारण कर इंद्रदेव का अहंकार किया समाप्त : आराध्या पांडे

भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को सात दिन-रात अंगुली पर धारण कर इंद्रदेव का अहंकार किया समाप्त : आराध्या पांडे

संग्रामपुर. संग्रामपुर के लक्ष्मीपुर वैष्णवी चैती दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय भागवत कथा के पंचम दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं वर्णन किया गया. कथा के दौरान कथावाचिका आराध्या पांडे ने भगवान की विभिन्न लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, विनम्रता और कर्म के महत्व का संदेश दिया. कथावाचिका ने श्रीकृष्ण के माखन-चोरी प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान को माखन इसलिए प्रिय है, क्योंकि माखन भक्त के निर्मल और कोमल हृदय का प्रतीक होता है. भगवान अपने भक्तों के ऐसे निष्कलंक प्रेम को स्वीकार करते हैं और सदैव उनके साथ रहते हैं. इसके बाद कालिय नाग की कथा का मार्मिक वर्णन किया गया. बताया गया कि कालिया नाग यमुना नदी में निवास करता था और उसके भय से कोई भी वहां जाने का साहस नहीं करता था. भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग का दमन कर ब्रजवासियों को भयमुक्त किया और यह संदेश दिया कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं. कथा के दौरान गोवर्धन लीला के बारे में बताया गया कि सात वर्ष के बालक कन्हैया ने अपनी छोटी अंगुली पर सात दिन और सात रात तक गोवर्धन पर्वत धारण कर इंद्रदेव के अभिमान को समाप्त किया. इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह सीख दी गई कि मनुष्य को कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए, बल्कि सदैव विनम्र रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए. कथावाचिका ने कर्म के महत्व पर विशेष जोर देते हुए कहा कि कर्म करना प्रत्येक जीव का धर्म है. जबकि उसके फल का निर्धारण भगवान के हाथ में होता है. इसलिए मनुष्य को बिना फल की चिंता किए सदैव अच्छे कर्म करते रहना चाहिए. इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं पर आधारित आकर्षक झांकियों की भी प्रस्तुति की गई. जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे.

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Published by: Anand kumar

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