मुंगेर में बड़ा महावीर मंदिर में क्यों उमड़ती है भक्तों की भीड़, जानिए आस्था की अनोखी कहानी

Aaj Ka Darshan: मुंगेर शहर का बड़ा महावीर मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गयी हर मनोकामना पूरी होती है. मंगलवार को यहां ऐसा नजारा दिखता है, मानो पूरा शहर भक्ति में डूब गया हो.

Aaj Ka Darshan: मुंगेर में शहर के बीचोंबीच स्थित टाउन हॉल का बड़ा महावीर मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है. पवनपुत्र हनुमान को समर्पित इस मंदिर में हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं, लेकिन मंगलवार को यहां भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ता है. सुबह से लेकर देर शाम तक मंदिर परिसर जय श्रीराम और बजरंगबली के जयकारों से गूंजता रहता है. लोगों का विश्वास है कि यहां माथा टेकने से संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

शहर की धड़कनों में बसता है बड़ा महावीर मंदिर

मुंगेर का बड़ा महावीर मंदिर वर्षों से लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है. मंदिर में सुबह की आरती से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो जाता है. कोई नौकरी की कामना लेकर पहुंचता है तो कोई परिवार की सुख-शांति के लिए हनुमान जी के चरणों में शीश झुकाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर शहर की धार्मिक पहचान बन चुका है.

मंदिर परिसर का वातावरण हमेशा भक्तिमय बना रहता है. यहां आने वाले श्रद्धालु हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और प्रसाद चढ़ाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं. खास बात यह है कि मंदिर में हर वर्ग और हर उम्र के लोग पहुंचते हैं.

दुर्गा विसर्जन यात्रा में दिखती है अद्भुत परंपरा

बड़ा महावीर मंदिर की एक अनोखी परंपरा भी लोगों को आकर्षित करती है. दुर्गा पूजा के बाद जब प्रतिमाएं सोझी घाट स्थित गंगा तट पर विसर्जन के लिए ले जायी जाती हैं, तब विसर्जन शोभायात्रा मंदिर के सामने कुछ देर के लिए रुकती है. यहां प्रतिमाओं की विशेष आरती की जाती है. यह दृश्य धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक एकता की खूबसूरत तस्वीर पेश करता है.

मंगलवार को भक्ति में डूब जाता है पूरा इलाका

मंगलवार को मंदिर का माहौल पूरी तरह बदल जाता है. सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं. मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाता है. हनुमान चालीसा और बजरंगबली के जयकारों से पूरा इलाका भक्तिमय हो उठता है. शाम होते-होते मंदिर परिसर दीपों और श्रद्धा की रोशनी से जगमगा उठता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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