गड़बड़ी. 16 जून को रेलवे बोर्ड के मेंबर ऑफ रॉलिंग आयेंगे जमालपुर
जमालपुर रेल कारखाना से वैगन गायब मामले को लेकर रेल मंत्रालय ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अब तक दो अधिकारियों ने कारखाना का निरीक्षण कर मामले की पड़ताल की.
जमालपुर : जमालपुर रेल इंजन कारखाना से दर्जनों वैगन गायब होने के मामले को लेकर मुख्यालय स्तर तक जहां खलबली मची है, वहीं स्थानीय स्तर पर संबद्ध विभागों के सक्षम अधिकारियों के होश उड़े हुए हैं. रेल नगरी जमालपुर में भी रेल वैगन के गायब होने के मामले को लेकर राजनीतिक सरगरमी तेज हो गयी है और विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसके विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद की है. आम लोगों में भी यह घोटाला चर्चा का विषय बना हुआ है. इधर वरीय रेल अधिकारी इस मामले के जांच में जुटे हैं और 16 जून को रेल मंत्रालय के मेंबर ऑफ रॉलिंग स्टॉक रवींद्र गुप्ता जमालपुर आयेंगे.
जमालपुर रेल कारखाना पिछले दो दशक से रेल अधिकारियों के लिए चारागाह बना हुआ है और लगातार वरीय रेल अधिकारी इस कारखाना के संपत्ति को व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण दोहन करते रहे हैं. पूर्व के मुख्य कारखाना प्रबंधक द्वारा यहां आने वाले दो दर्जन से अधिक रेल वैगनों को गायब कर दिया गया. जब यह मामला उजागर हुआ तो रेल महकमे में हड़कंप मच गयी और आनन-फानन में यहां के मुख्य कारखाना प्रबंधक को हटा दिया गया. इधर रेल मंत्रालय इस मामले की जांच की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है. 31 मई को पूर्व रेलवे के मुख्य सुरक्षा आयुक्त सुनिल कुमार सिन्हा जमालपुर पहुंचे थे
और वे मामले की पड़ताल कर वापस कोलकाता लौट गये. इधर दो जून को पूर्व रेलवे के मुख्य कारखाना अभियंता एसआर घोषाल ने जमालपुर कारखाना का निरीक्षण किया. वहीं आगामी 7 जून को पूर्व रेलवे के मुख्य यांत्रिक अभियंता आरएल गुप्ता भी जमालपुर आकर मामले की जांच करेंगे. आधिकारिक सूत्रों द्वारा बताया गया है
कि 16 जून को रेलवे बोर्ड के मेंबर ऑफ रॉलिंग स्टॉक रवींद्र गुप्ता के नेतृत्व में अधिकारियों का दल जमालपुर आयेंगे. उनके साथ रेलवे बोर्ड के मेंबर ट्रैक्शन घनश्याम सिंह तथा पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक हरेंद्र राव के भी आने की संभावना है. इन अधिकारियों के जमालपुर आगमन से रेल अधिकारियों में खलबली मची हुई है. दूसरी ओर रेलकर्मियों में यह चर्चा बनी हुई है कि पूर्व में भी लगभग 25 से 30 वर्षों के दौरान रेल कारखाना में केमिकल घोटाला और लकड़ी की सिल्ली घोटाला का मामला सामने आया था. जबकि कुछ जानकार बताते हैं कि जमालपुर रेल इंजन कारखाना से चोरी का मामला पहले से भी छाया रहा है.
पूर्व रेल मंत्री केदार पांडेय ने जमालपुर रेल इंजन कारखाना की सुरक्षा में सेंध की खबर आने के बाद यहां आरपीएफ के सहायक सुरक्षा अधिकारी के रूप में ललित कुमार जैसे तेज तर्रार अधिकारी को लगाया था. जिसके कारण यहां की सुरक्षा व्यवस्था तो चाक चौबंद बनायी गयी. लेकिन उनके स्थानांतरण के साथ ही पुन: चोर व आपराधिक तत्वों का वर्चस्व क्षेत्र में कायम हो गया.
