मुंगेर में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 24 ड्रिंकिंग वाटर के प्लांट चल रहे हैं. जिसमें शायद किसी के पास वैद्य लाइसेंस है. मुंगेर जिले में आज शहर से लेकर गांव तक दर्जनों ड्रिंकिं ग वाटर के प्लांट लगे हैं. जहां सील बंद बोतल के साथ ही 20 लीटर के जार में पानी भर कर बेचा जा रहा है. शहर में शादी-विवाह का मौका हो या कोई अन्य पार्टी. सभी जगह 20 लीटर जार का ही उपयोग हो रहा है. अब तो बैंक, पोस्टऑफिस सहित कई कोरपोरेट कार्यालयों में भी जार का उपयोग हो रहा है. लेकिन इसकी शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है.
पानी का हुआ बाजारीकरण: शुद्धता की यहां नहीं मिलेगी गारंटी, बिना लाइसेंस चल रहे वाटर प्लांट
मुंगेर: हवा और पानी के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती. औद्योगिकीकरण एवं अन्य कारणों से जहां हवा प्रदूषित हो रही है वहीं आज पानी भी शुद्ध नहीं मिल रहा. मुंगेर का एक बड़ा भू-भाग जहां फ्लोराइड प्रभावित गंगा किनारे का इलाका आर्सेनिक से प्रभावित है. दूसरी ओर पानी का बाजारीकरण भी शुद्धता […]

मुंगेर: हवा और पानी के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती. औद्योगिकीकरण एवं अन्य कारणों से जहां हवा प्रदूषित हो रही है वहीं आज पानी भी शुद्ध नहीं मिल रहा. मुंगेर का एक बड़ा भू-भाग जहां फ्लोराइड प्रभावित गंगा किनारे का इलाका आर्सेनिक से प्रभावित है. दूसरी ओर पानी का बाजारीकरण भी शुद्धता की गारंटी नहीं दे रही.
भू-गर्भीय जल का हो रहा दोहन
ड्रिंकिंग वाटर का प्लांट चलाने के लिए भू-गर्भीय जल का जमकर दोहन हो रहा है. ऐसे संचालक जिला उद्योग केंद्र से महज उद्यमी निबंधन कराकर भू-गर्भीय जल को निकाल रहे हैं. जबकि नियमानुकूल इसके लिए केंद्रीय जल बोर्ड से अनुमति लेनी है. साथ ही बेस्ट वाटर को पुन: जमीन के अंदर डालने का भी प्रबंधन करना है. ताकि वाटर लेवल बरकरार रहे. लेकिन व्यवसायीकरण के इस व्यवस्था में धड़ल्ले से कानून को ताख पर रख कर पानी का दोहन किया जा रहा है.
नहीं है वाटर लैब की व्यवस्था
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मुंगेर में 24 ड्रिंकिंग वाटर प्लांट लगे हैं. लेकिन इनमें से किसी के पास वाटर लैब की व्यवस्था नहीं है कि पता चल सके कि पानी में फ्लोराइड, आर्सेनिक, मिनरल, ऑक्सीमा की मात्र कितनी है. लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता देवेंद्र प्रसाद ने कहा कि वाटर प्लांट में लैब का होना जरूरी है. क्योंकि बिना लैब का पानी की शुद्धता का पता नहीं चल सकता.
एसडीओ ने दिये जांच के आदेश
सुरक्षा मानकों के अनुरूप ड्रिंकिंग वाटर तो तैयार करने एवं बिक्री के लिए अनुमंडल पदाधिकारी डॉ कुंदन कुमार ने जांच के आदेश दिये हैं. उन्होंने कहा है कि बिना आइएसआइ मार्का के बोतल बंद पानी का उपयोग पूरी तरह अवैध है. यह लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है. इसलिए जो भी प्लांट चल रहे हैं. उसकी जांच किया जाना चाहिए. उन्होंने सभी अंचलाधिकारी व थानाध्यक्षों को जांच के निर्देश दिये हैं.