सौ वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी मेदनी प्रसाद का निधन

संग्रामपुर: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक योद्धा नवगांई गांव निवासी 100 वर्षीय मेदनी प्रसाद सिंह की मौत सोमवार की देर शाम हो गयी. उनकी मौत से नवगांई गांव ही नहीं प्रखंड व अनुमंडल गम में डूब गया. 10 दिन पूर्व तक उनके ओज और जज्बे में कोई कमी नहीं थी. लेकिन बीमारी ने उन्हें मौत […]

संग्रामपुर: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक योद्धा नवगांई गांव निवासी 100 वर्षीय मेदनी प्रसाद सिंह की मौत सोमवार की देर शाम हो गयी. उनकी मौत से नवगांई गांव ही नहीं प्रखंड व अनुमंडल गम में डूब गया. 10 दिन पूर्व तक उनके ओज और जज्बे में कोई कमी नहीं थी. लेकिन बीमारी ने उन्हें मौत के आगोश में सुला दिया. अनवरत देश और समाज की सेवा में लगे रहने वाले मेदनी सिंह की मृत्यु से एक वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी एवं सच्चे समाज सेवक का अंत हो गया. वे अपने पीछे 3 पुत्र एवं 1 पुत्री छोड़ गये. उनके सबसे बड़े बेटे पुष्पेंद्र कुमार सिंह आरएस कॉलेज तारापुर के प्राचार्य है. उनका अंतिम संस्कार सुलतानगंज गंगा घाट पर संपन्न हुआ.

अंगरेजी हुकूमत से ली टक्कर : अंगरेजी हुकुमत से दर्जनों बार आमने-सामने की टक्कर ले चुके एक वीर स्वतंत्रता सेनानी मेदनी प्रसाद नहीं रहे. लेकिन उसकी कीर्ति आज भी समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है.

स्वतंत्र विचार के थे मेदनी प्रसाद : मेदनी प्रसाद सिंह का जन्म सन् 1915 ई में एक किसान परिवार में हुआ. वे बचपन से ही स्वतंत्र विचार के बालक थे. बचपन में ही वे अकसर बुजुर्गो के साथ बैठ कर अंगरेजों के जुल्म की बातें सुन-सुन कर उनके दुश्मन बन गये. पढ़ाई लिखाई के साथ बच्चों की टोली बनाकर अंगरेज सिपाहियों के घोड़े पर पत्थर फेंकना इनकी आदत में शुमार हो गया था. कई बार सिपाहियों के कोड़े भी पड़ते थे. एक बार तो इन्हें खड़गपुर ले जाकर अंग्रेज सिपाहियों ने इतना पीटा कि वे इन्हें मृत समझ कर खड़गपुर पुल के नीचे डाल दिया था.

कहते हैं परिजन : पुत्र पुष्पेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि जब स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को पेंशन देने की बात हुई तो वे आक्रोशित हो जाते थे. उनका कहना था कि अपनी मां की सेवा के बदले पैसा लेकर वे नहीं जी सकेंगे. लोगों के लाख कहने पर भी उन्होंने कभी पेंशन लेना स्वीकार नहीं किया. वे बताते है कि उनके पिता का नाम बिहार सरकार के गृह विशेष संधारित स्वतंत्रता सेनानी की पंजी में अग्रिम पंक्ति में दर्ज है. उनके पिता ने स्व नित्यानंद सिंह के साथ मिलकर युवक संघ बनाया था जो नवगांई में आज भी कायम है.

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