कवि गोष्ठी का आयोजनप्रतिनिधि , मुंगेर गंगोत्री के तत्वावधान में मंगलवार को कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया. उसकी अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष डॉ शिवचंद्र प्रताप ने की. कवि गोष्ठी का शुभारंभ डॉ शिवचंद्र प्रताप के ” मामला कुर्सी का ” शीर्षक कविता से हुआ. उन्होंने कहा कि … ” लाख गुड करते रहो, पर फील हम होने नहीं देंगे, देश जाये भाड़ में , कुर्सी तुम्हें लेने नहीं देंग! हम हजारों जात में, इस मुल्क को तकसीम कर देंगे, सिर्फ दो फिरके रहे, ऐसा कभी होने नहीं देंगे !!”. बाल कवि दिव्यांशु शेखर ने कहा ” आओ सुनाऊ एक कहानी, जिसका नाम है हमारे स्वतंत्रता सेनानी, महात्मा गांधी ने जब सत्याग्रह किया, उससे पहले गोखले से ज्ञान लिया ”. कवि ज्योति कुमार सिन्हा ने भूकंप के झटके का एहसास कराते हुए कहा ” जिंदगी में मौत अनचाहा सिलसिला आया, धरती के साथ रूह भी कांप उठी ऐसा जलजला आया ”. निधि शेखर कहती है ” मिलेगा क्या हमें दुनिया से दिल लगा के कहो तो, नजर जब आयेगी मंजिल जमी पे हम न रहेंग ”. गीतकार शिवनंदन सलिल ने तरन्नुम में गीत प्रस्तुत किया. जिसके बोल थे ” जनम-जनम के साथ से अच्छा पल दो पल का साथ, पहचाने हाथों से अच्छा अनजानों का हाथ ”. अंगिका भाषा के महाकवि विजेता मुद्गलपुरी ने अपनी रचना सुनायी. जिनके बोल थे ” छंद हीन के, नै बांधि पावै छै, छंदहीन कविता, समाज, लतीफा के शरण में चलल गेलै, थोड़ी सी गुदगुदी के लेली” था. मौके पर आचार्य नारायण शर्मा, डॉ केके वाजपेयी, मधु सहाय मधु, डॉ पूनम रानी, गुरुदयाल त्रिविक्रम, शीतांशु शेखर, श्याम सुंदर प्रसाद मौजूद थे.
लाख गुड करते रहो, पर फील हम होने नहीं देंगे...
कवि गोष्ठी का आयोजनप्रतिनिधि , मुंगेर गंगोत्री के तत्वावधान में मंगलवार को कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया. उसकी अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष डॉ शिवचंद्र प्रताप ने की. कवि गोष्ठी का शुभारंभ डॉ शिवचंद्र प्रताप के ” मामला कुर्सी का ” शीर्षक कविता से हुआ. उन्होंने कहा कि … ” लाख गुड करते रहो, पर […]
