संग्रामपुर : बिचौलिया के पास नहीं बल्कि सरकार के पास धान बेच कर किसान पिछले चार माह से पाई-पाई को मुहताज हैं. किसी के घर बेटी का ब्याह रुका है तो किसी के घर बीमारी का इलाज नहीं हो पा रहा है. कोई अपने बेटे-बेटी के पढ़ाई का खर्च नहीं दे पा रहे. सरकार की घोषणाओं पर भरोसा कर पैक्स को किसानों ने अपना धान बेचा है. लेकिन राशि का भुगतान अबतक नहीं हो पाया है. धान के बाद गेहूं का फसल भी बारिश, आंधी व ओलावृष्टि में बरबाद हो चुकी है.
इन सारी समस्याओं के अलावे फिर से धान के बिचड़े गिराने का समय भी आ गया है. किसानों की इन समस्याओं को समझते हुए जिला पदाधिकारी मुंगेर के विशेष निर्देश पर डीसीएलआर तारापुर पुष्पेश कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारी कृष्णा चौधरी ने रविवार को कुसमार पैक्स आकर किसानों द्वारा दिये गये धान एवं उसके बदले जमा की गयी राजस्व लगान की रसीद व एलपीसी की जांच की.
अधिकारियों ने बताया कि जांच के क्रम में मुख्य रुप से यह देखा गया कि धान देने वाले कितने किसानों की रेंट रसीद बांका जिले की है. क्या देने वाले किसान वास्तव में कुसमार पैक्स के सदस्य है या नहीं. वहीं किसानों ने बताया कि मुंगेर एवं बांका जिले की सीमा संग्रामपुर को बांटती है. ऐसे में कुसमार पैक्स के अधिकांश किसानों की अधिकतम जमीन बेलहर अंचल में भी है.
चूंकि उनके पास मतदाता पहचान पत्र संग्रामपुर का है. इसलिए उनको कुसमार में ही धान देना बाध्यता है. जिला सहकारिता पदाधिकारी ने इसके लिए किसानों को एक शपथ पत्र भरने निर्देश दिया. मौके पर डीएसपी राजवंश सिंह, बीडीओ प्रीतम आनंद, थानाध्यक्ष ब्रजेश कुमार मुख्य रुप से मौजूद थे.
