फर्जी डिग्री पर शिक्षक की नौकरी करने वालों की अब खैर नहीं

मुंगेर : फर्जी दस्तावेज पर नियोजित हुए शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों की नौकरी अब खतरे में है. शिक्षा विभाग 2006 के बाद नियुक्त सभी नियोजित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच करेगी और उसके बाद ही शिक्षकों को वेतन का भुगतान हो पायेगा. शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने आदेश दिया है कि वर्ष 2006 से […]

मुंगेर : फर्जी दस्तावेज पर नियोजित हुए शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों की नौकरी अब खतरे में है. शिक्षा विभाग 2006 के बाद नियुक्त सभी नियोजित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच करेगी और उसके बाद ही शिक्षकों को वेतन का भुगतान हो पायेगा. शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने आदेश दिया है कि वर्ष 2006 से अबतक हुए नियोजित शिक्षक व पुस्तकालयाध्यक्षों के प्रमाण पत्रों की जांच की जाय.

अगर 15 जून 2015 तक जांच पूरी नहीं होती है तो वैसे शिक्षकों के वेतन का भुगतान न करें. बताया जाता है कि सरकार ने शिक्षकों के रिक्त पड़े स्थानों को भरने के लिए वर्ष 2006 में नियोजन प्रक्रिया प्रारंभ की थी. जिसमें अंक के आधार पर अभ्यर्थियों को शिक्षक बनाया गया. इस प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज का जम कर इस्तेमाल किया गया और बड़ी संख्या में जाली कागजात के आधार पर शिक्षक बहाल हुए.
वर्ष 2008 में भी फर्जी दस्तावेज का खेल चला. पंचायत से लेकर नगर तक में शिक्षक बहाली हुई. इस दौरान नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्क्षों के सर्टिफिकेट की जांच प्रारंभ हुई. लेकिन अधिकांश लोगों के दस्तावेज की जांच नहीं हो पायी और वे शिक्षक के पद पर आज भी तैनात है. वर्ष 2011 में टीइटी की परीक्षा के माध्यम से शिक्षक नियोजन की प्रक्रिया की गयी. इसमें भी व्यापक स्तर पर फर्जीवाड़ा हुआ है. यहां तक कि फर्जी टीइटी परीक्षा पास का सर्टिफिकेट पर भी लोग नियोजित हो गये. समय-समय पर जब भी प्रमाण-पत्रों की जांच हुई तो यहां फर्जीवाड़ा का भी परदाफाश हुआ. लेकिन हर बार मामले को रफा-दफा कर दिया गया.
अब प्रमाण पत्रों की होगी जांच : प्रधान सचिव ने प्रमंडलीय शिक्षा उप निदेशक को इस संबंध में पत्र भेजा है कि वर्ष 2006 से अबतक नियोजित होने वाले शिक्षक एवं पुस्तकालयाध्क्षों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जाय. 15 जून 2015 तक ही नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों के मानदेय का भुगतान किया जायेगा. उसके बाद बिना प्रमाण पत्र सत्यापन के मानदेय भुगतान पर रोक लगा दिया जायेगा. जिसने भी शैक्षणिक प्रमाण पत्र की जांच नहीं करायी है. वे अपने प्रमाण पत्रों की जांच करा ले.

कहते हैं अधिकारी

प्रमंडलीय शिक्षा उप निदेशक उषा कुमारी ने कहा कि प्रधान सचिव के निर्देश के आलोक में जिला शिक्षा पदाधिकारियों को प्रमाण पत्र जांच के निर्देश दिये गये हैं. प्रमाण पत्र जांच के बाद ही शिक्षकों के वेतन का भुगतान होगा.
शिक्षा विभाग हुआ सक्रिय
विभिन्न जिलों में फर्जी टीइटी के प्रमाण पत्र पर नौकरी के मामले जब अखबारों की सुर्खियां बनी तो विभाग ने इस मामले में संज्ञान लिया. शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने यह आदेश जारी किया है कि नियोजित सभी शिक्षक एवं पुस्तकालयध्यक्ष के टीइटी प्रमाण पत्र की जांच की जाय. हाल यह है कि एक टीइटी प्रमाण पत्र को स्कैन कर तीन-चार लोग नौकरी कर रहे हैं. कई मामले तो शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों के संज्ञान में भी है. लेकिन लेकिन वह रहस्यमय चुप्पी साधे हुए हैं.

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