निगम में रजिस्टर्ड वेंडरों की संख्या 3130, लाभान्वित हो गये 3216 वेंडर

वेंडिंग जोन के अभाव में सड़कों व फुटपाथ पर वेंडरों का कब्जा, जाम से लोग परेशान

बदहाल व्यवस्था : वेंडिंग जोन का पता नहीं, फिर भी पीएम स्वनिधि के तहत बंट गये करोड़ों रुपये

मुंगेर. मुंगेर शहर में लगातार गारमेंट शोरूम, ज्वेलरी शॉप, बाइक शोरूम, मॉल, रेस्टोरेंट खोले जा रहे हैं. नगर निगम प्रशासन भी शहरी विकास पर प्रतिवर्ष करोड़ों खर्च कर रहा है, लेकिन मुंगेर शहर की सूरत नहीं बदल रही. शहर में वेंडिंग जोन के अभाव में सड़कों व फुटपाथ पर वेंडरों का कब्जा है और शहर जाम से परेशान है. हद तो यह है कि निगम ने भले ही फुटपाथ पर वेंडरों को वेंडिंग जोन उपलब्ध नहीं कराया है, पर वेंडरों के नाम पर पीएम स्वनिधि योजना के तहत 4.69 करोड़ रुपये बांट दिये गये.

वेंडिंग जोन का पता नहीं, बंट गये 4.69 करोड़

मुंगेर नगर निगम क्षेत्र में फुटपाथ पर दुकानदारी करने वाले वेंडरों की भरमार है. स्ट्रीट वेंडरों की स्थिति में सुधार के लिए राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन को शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य वर्धित बाजार के अवसरों तक शहरी पथ विक्रेताओं की पहुंच को सुगम बनाने के लिए उन्हें उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराना, संस्थागत ऋण उपलब्ध कराना, सामाजिक सुरक्षा एवं कौशल उपलब्ध कराना है. वेंडरों के लिए प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर की आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि ) योजना प्रारंभ की गयी. मुंगेर नगर निगम के अधीन 3130 रजिस्टर्ड स्ट्रीट वेंडर हैं. लेकिन इस योजना के तहत 5243 योग्य वेंडरों ने ऋण के लिए आवेदन किया. इसमें 3412 वेंडरों का आवेदन विभिन्न बैंकों ने स्वीकृत किया और 3216 वेंडरों को इस योजना के तहत 4.69 करोड़ रुपये का ऋण व्यवसाय बढ़ाने के लिए दिया गया. विदित हो कि इस योजना के तहत पूर्व में प्रथम किस्त में 10 हजार, द्वितीय किस्त में 20 हजार एवं तृतीय किस्त में 50 हजार दिया जाता था. लेकिन अप्रैल 2025 से प्रथम किस्त में 15 हजार, द्वितीय किस्त में 25 हजार ओर तृतीय किस्त में 50 हजार रुपये दिये जा रहे हैं.

वेंडिंग जोन नहीं रहने से सड़कों व फुटपाथ पर सजती हैं दुकानें

मुंगेर एक ऐसा शहर है, जिसके पास वेंडिंग जोन तक नहीं है. हालांकि कौड़ा मैदान गड़ैया मार्केट को निगम वेंडिंग जोन बता रहा है. लेकिन वहां एक भी दुकान नहीं है. इसके कारण शहर में फुटपाथ और सड़कें वेंडिंग जोन बनी हुई है, जहां सुबह से लेकर रात तक दुकानें सजी रहती है. फुटपाथ, चौक-चौराहा और सड़कों तक को अतिक्रमणकारियों ने अपने कब्जे में ले रखा है. एक नंबर ट्रैफिक से गांधी चौक, अस्पताल मार्ग, कोतवाली मोड़ से नीलम सिनेमा चौक, शीतला स्थान चौक, कौड़ा मैदान, गुलजार पोखर, शादीपुर, बेकापुर, बेकापुर किराना पट्टी समेत अन्य मार्गों को फुटपाथी दुकानदारों, सब्जी व फल विक्रेताओं ने अपने कब्जे में ले लिया है. एक नंबर ट्रैफिक चौक, राजीव गांधी चौक पर फल विक्रेताओं का ठेला लगा रहता है. आजाद चौक के आस-पास फल व सब्जी विक्रेताओं का पूरी तरह से कब्जा है. स्थिति यह है कि अतिक्रमणकारियों ने फुटपाथ ही नहीं, सड़क के किनारे वाले हिस्सों को भी अपने कब्जे में कर लिया है. अतिक्रमण की स्थिति देख ऐसा लगता है कि शहर की सड़क व फुटपाथ ही वेडिंग जोन हो है.

कहते हैं नगर आयुक्त

नगर आयुक्त पार्थ गुप्ता ने बताया कि वेंडिंग जोन के लिए जगह चिह्नित कर लिया गया है. जहां अभियान चला कर बेंडरों को शिफ्ट कराने की योजना है. जिस पर काम चल रहा है.

वेडिंग जोन बनाने के नाम पर हो गये लाखों खर्च

मुंगेर. नगर निगम की बैठकों में कई बार फुटपाथी दुकानदार, ठेला व खोमचा वालों के लिए वेंडिंग जोन बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ. फाइलें तैयार हुईं और वेंडिंग जोन के लिए जगह चिह्नित कर लाखों रुपये निगम ने जगह को व्यवस्थित करने पर फूंक दिया. लेकिन आज भी वेंडिंग जोन बनाने का निर्णय निगम के फाइलों में ही पड़ा हुआ है. विदित हो कि अगस्त 2024 में नगर निगम ने कंपनी गार्डन के पास, दो नंबर गुमटी रेलवे लाइन के आसपास व गड़ैया मार्केट में वेंडिंग जोन के रूप में चिह्नित किया. दो नंबर गुमटी रेलवे लाइन के पास नगर निगम ने जेसीबी से जमीन को समतल भी कराया था, जिस पर लाखों खर्च हुए. जबकि गड़ैयामार्केंट में भी लाखों खर्च कर जमीन तैयार की गयी थी, लेकिन योजना धरातल पर नहीं उतर सकी. फरवरी 2026 में भी इन्हीं तीनों जगह को वेंडिंग जोन के रूप में चिह्नित कर शहर के फुटपाथी व ठेला दुकानदारों को शिफ्ट करने की योजना बनायी गयी. 300 से अधिक ऐसे दुकानदारों को नोटिस भी निर्गत कराया गया, लेकिन आज तक न तो शहर से अतिक्रमण हटा और न ही ठेले वाले वहां शिफ्ट हो सके. आज भी शहर के फुटपाथ, चौक-चौराहे व सड़कों पर इनका कब्जा जस का तस बरकरार है.

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Published by: Birendra kumar sing

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