एएनसी जांच में 15 महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी चिन्हित, स्वास्थ्य विभाग करेगी विशेष उपचार
एएनसी जांच में 15 महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी चिन्हित, स्वास्थ्य विभाग करेगी विशेष उपचार
By ANAND KUMAR | Updated at :
तारापुर/ हवेली खड़गपुर. प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत सोमवार को अनुमंडलीय अस्पताल, तारापुर व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, खड़गपुर में गर्भवती महिलाओं का प्रसव पूर्व जांच किया गया. जांच के दौरान कुल 15 गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क प्रेगनेंसी के लिए चिन्हित किया गया. जिसका स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष रूप से मॉनिटरिंग कर उपचार किया जायेगा.
तारापुर प्रतिनिधि के अनुसार,
अनुमंडलीय अस्पताल, तारापुर में आयोजित मासिक जांच शिविर में कुल 171 गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच की गयी. जांच के दौरान नौ गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क श्रेणी में चिन्हित किया गया. उनकी विशेष निगरानी व इलाज की व्यवस्था की गयी. शिविर में सभी गर्भवतियों का आवश्यक पैथोलॉजी जांच एवं वजन मापा गया. साथ ही उन्हें आयरन व कैल्शियम की गोलियां व अन्य आवश्यक दवाएं उपलब्ध करायी गयी. अल्ट्रासाउंड के स्थान पर गर्भ में शिशु की धड़कन की जांच के लिए एफएचएस कराया गया व उचित परामर्श दिया गया. वहीं प्रभारी उपाधीक्षक डॉ बिंदु कुमारी ने गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर जांच कराने, संतुलित आहार लेने और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेने की सलाह दी. ताकि मां और शिशु दोनों स्वस्थ रह सकें. शिविर को सफल बनाने में स्वास्थ्य प्रबंधक मनीष कुमार प्रणय सहित स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभायी.
हवेली खड़गपुर प्रतिनिधि के अनुसार,
खड़गपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉ अर्चना के नेतृत्व में आयोजित शिविर में कुल 198 गर्भवती महिलाओं स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिसमें छह गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी पीड़िता चिन्हित की गयी. मौके पर महिला चिकित्सक डॉ अंशु शांडिल्य ने बताया कि शिविर में हाई रिस्क प्रेगनेंसी के चिन्हित पीड़िता का स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष मॉनिटरिंग किया जाता है. इसके लिए सभी पीड़िता का पूरा बायोडाटा तैयार किया गया है, जिसका अस्पताल में विशेष इलाज किया जायेगा. इलाज के दौरान मरीज को दवा की उपलब्धता के साथ प्रसव के पूर्व बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया गया. उन्होंने बताया कि हाई रिस्क में उच्च रक्तचाप, ब्लड सुगर, खून की कमी, एड्स पीड़ित, किसी भी आसाध्य बीमारी एवं पूर्व में सिजेरियन के माध्यम से प्रसव वाली गर्भवती महिला शामिल होती है. जांच का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान महिला को समय पर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करना, मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करना, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था को पहचानना और प्रबंधित करना, प्रसव पूर्व देखभाल के लिए जागरूकता बढ़ाना है.