मुंगेर में खास होती है मां दुर्गा की विसर्जन शोभायात्रा

डोली पर उठती है बड़ी मां दुर्गा, बड़ी मां काली, छोटी दुर्गा व छोटी काली मुंगेर : मुंगेर की दुर्गा पूजा काफी खास है. यहां पूजा की धूम महालया से ही प्रारंभ हो जाती है. जो लगातार 12 दिनों तक जारी रहता है. यहां की विसर्जन शोभा यात्रा की एक अलग ही पहचान है. जिसमें […]

डोली पर उठती है बड़ी मां दुर्गा, बड़ी मां काली, छोटी दुर्गा व छोटी काली

मुंगेर : मुंगेर की दुर्गा पूजा काफी खास है. यहां पूजा की धूम महालया से ही प्रारंभ हो जाती है. जो लगातार 12 दिनों तक जारी रहता है. यहां की विसर्जन शोभा यात्रा की एक अलग ही पहचान है. जिसमें न सिर्फ मुंगेर जिले के बल्कि मुंगेर प्रमंडल के विभिन्न भागों से श्रद्धालु विसर्जन शोभा में भाग लेने आते हैं. बड़ी मां दुर्गा, बड़ी मां काली, छोटी दुर्गा व छोटी काली की प्रतिमा विसर्जन के लिए कहार डोली पर ले जाते हैं. यहां के विसर्जन शोभा यात्रा में खगड़िया, लखीसराय, बेगूसराय, शेखपुरा व जमुई जिले के लाखों लोगों की भीड़ पहुंचती है. इतना ही नहीं यहां का दुर्गापूजा भी अन्य जगहों से खास है़ जिसकी सबसे बड़ी खासियत है कि मां की प्रतिमा मंदिर में ही स्थापित होती है. जिले के किसी भी हिस्से में माता दुर्गा की प्रतिमा खुले में पंडाल बना का स्थापित नहीं होती.
मुंगेर की मां चंडिका एवं बड़ी दुर्गा महारानी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहता है. कहा जाता है कि सती की दायी आंख मुंगेर में गिरी थी. इसलिए यहां चंडिका स्थान में सती के आंख के पूजा होती है. यहां मुंगेर ही नहीं देश-विदेश से लोग पूजा करने पहुंचती है. दुर्गा पूजा का प्रमुख आकर्षण बड़ी दुर्गा महारानी जी हैं. मां की ममता इतनी अपरम्पार है कि दूर दूर से श्रद्धालु मां की एक झलक पाने को बेताब रहते हैं. मां का सुंदर रूप शांत होने के साथ-साथ चंचल भी है, जहां एक ओर मां क्रुद्ध नजर आती हैं, अगले ही क्षण मुस्कुराती प्रतीत होती हैं.
मंदिरों में बैठती है मां की प्रतिमा:
मुंगेर में सभी पूजा समितियों का अपना मंदिर है जिसमे मां की पूजा होती है. दुर्गा पूजा के समाप्त हो जाने के बाद भी भक्त मां के मंदिर में सालों पूजा करते रहते हैं. विदित हो कि मुंगेर जिले में लगभग 200 से अधिक प्रतिमाएं बनती है. लोग इतनी प्रतिमाएं देख नहीं पाते. इसलिए मुख्य प्रतिमाएं ही देखते है. जैसे आप मुंगेर आए हैं तो शादीपुर पहुंचे तथा वहां पर बड़ी मां, छोटी मां के साथ ८-१० अन्य प्रतिमा देखीं जा सकती है. सिर्फ शादीपुर में ही 5 प्रतिमाएं बनती है. हर प्रतिमा सोने-चांदी के जेवरों से लदी होती है.
विजर्सन शोभा यात्रा में लगती है लाखों की भीड़ : रात भर शहर भ्रमण के पश्चात बड़ी मां की प्रतिमाएं एक नंबर ट्रैफिक पर पहुंचती है. जहां से वह कतारबद्ध हो कर सोझी घाट की ओर प्रस्थान करती है. बड़ा महावीर स्थान में हर प्रतिमा की आरती उतारी जाती है. अमूमन हर प्रतिमा के आगे एक अखाड़ा होता है जो अस्त्र-शस्त्र एवं पराक्रम का प्रदर्शन करते हैं. विसर्जन के दौरान बहुत ज्यादा भीड़ होती है. जिसे नियंत्रित करने को प्रशासन काफी मशक्कत करनी पड़ती है. रास्ते में कई संस्थाएं शिविर लगा कर जनसेवा करती है. एकादशी को सुबह बड़ी मां की भव्य आरती हो जाने के बाद ही बांकि प्रतिमाएं आगे बढती है. दिन भर विसर्जन के ढोल-नगाडों के बीच अगली सुबह होती है जमालपुर की प्रतिमाओं के नाम. लोग प्रमुख चौराहों पर भीड़ लगा कर खड़े रहते है. रंग-बिरंगे विद्युत बल्बों की रोशनी द्वारा ज्वलंत मुद्दों को उठाती ट्रॉलियों पर सवार हो कर जब माता की प्रतिमाएं मुंगेर आती है, तो लोग बस देखते ही रह जाते हैं.

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